हिमाचल की तर्ज पर उत्तराखण्ड में भू-कानून लागू करने की मांग की

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। उत्तराखण्ड में भू-कानून लागू करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। उत्तराखंड में भू-कानून लागू करने की मांग लगातार उठाई जा रही हैं। ऐसा लग रहा है कि पहाड़ के लोग पिछले भू-कानून में सुधार लाकर ही चैन की सांस लेंगे। उत्तराखंड क्रांति दल ने सरकार से हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भू-कानून लागू करने की मांग की है।
पदमपुर सुखरौ स्थित संगठन कार्यालय में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पड़ोसी राज्य हिमाचल में एक मजबूत भू-कानून होने के कारण वहां बाहरी उद्योगपतियों, बिल्डरो और भू माफियाओ को जमीन नहीं मिलती, जिससे हिमाचल की पहचान बागवानी और उसकी पहाड़ी खूबसूरती पर कोई असर न पड़ सके। इस ऐतिहासिक फैसलों से आज भी हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य की खूबसूरती को संजोए रखा है। उत्तराखंड की खूबसूरती को यदि सजाए रखना है तो भू-कानून बहुत जरूरी है। प्रदेश में भू-कानून आने से जहां एक ओर प्रदेश की जनता को फायदा होगा वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड में पर्यटन के द्वार खुलेंगे, जिससे रोजगार भी बड़े पैमाने पर उपलब्ध हो सकेगा। यूकेडी हमेशा से भी एक सशक्त भू-कानून की मांग करती आई है।
उत्तराखंड में भू कानून की मांग इसलिए बढ़ रही है ताकि उत्तराखंड के लोग जायदा पैसों के लालच में कहीं बाहरी लोगों को यहां की जमीन न बेच दे। जम्मू कश्मीर हो या हिमाचल प्रदेश बाहरी राज्य का कोई भी वहां जमीन नहीं खरीद सकता, हिमाचल प्रदेश में 1972 में ही सख्त कानून बन गया था। बैठक का संचालन महानगर अध्यक्ष गुलाब सिंह रावत ने किया। बैठक में यूकेडी के केंद्रीय महामंत्री महेंद्र सिंह रावत, जिलाध्यक्ष पंकज उनियाल, भूपाल सिंह रावत, अमित चौधरी, शैलेश, हरीश और अशोक आदि मौजूद रहे।

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