साहस व प्रतिबद्धता से नरेंद्र उनियाल ने जनपक्षीय पत्रकारिता की परंपरा को किया मजबूत

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क्रांतिकारी पत्रकार अमर लोकतंत्र सेनानी नरेंद्र उनियाल की 75वीं जयंती पर आयोजित हुआ कार्यक्रम
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : जनपक्षीय पत्रकारिता की मजबूत परंपरा को आगे बढ़ाने में नरेंद्र उनियाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अपने साहस, निष्पक्षता और सामाजिक सरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता के कारण वे लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहते थे। पत्रकारिता के माध्यम से वह कमजोर, वंचित और उपेक्षित वर्गों की आवाज को मंच देने के प्रयास में जुटे रहे। बेहतर समाज निर्माण में दिए गए नरेंद्र उनियाल के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
गुरूवार को क्रांतिकारी पत्रकार, अमर लोकतंत्र सेनानी नरेंद्र उनियाल की 75वीं जयंती पर वक्ताओं ने यह बात कही। कोटद्वार बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले हुए जयंती समारोह में सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने नरेंद्र उनियाल के योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि, उन्होंने अपने साहस और प्रतिबद्धता से जनपक्षीय पत्रकारिता की परंपरा को मजबूत किया तथा नरेंद्र उनियाल उन पत्रकारों में थे जिनके लिए पत्रकारिता केवल खबर लिखने का माध्यम नहीं थी, बल्कि समाज के संघर्षों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का दायित्व थी। उनके संपादन में प्रकाशित समाचार पत्र धधकता पहाड़ अपने समय में जनपक्षीय और निर्भीक पत्रकारिता का प्रतीक बन गया था। पहाड़ के सामाजिक-आर्थिकी के सवाल, आम लोगों की पीड़ा और क्षेत्रीय असमानताओं के मुद्दे इस अखबार के माध्यम से प्रभावी ढंग से उजागर किया जाता था। यही कारण रहा की आपातकालीन समय तत्कालीन सरकार की आंख की किरकीरी रहे, वे 19 माह तक जेल में रहे। इस अवसर पर कोटद्वार विकास का रोड़मैप के लिए एक दृष्टि पत्र भी जारी किया गया। दृष्टि पत्र में अनेक सवाल उठाये गये हैं। इस दृष्टि पत्र में कोटद्वार विकास को अवरूद्ध करने के लिए राज्य में गठित होने वाली सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुए समाधान भी सुझाये गये हैं। दृष्टि पत्र में कहा गया है कि, राज्य सरकारों ने स्थानीय जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। कार्यक्रम संयोजक नागेन्द्र उनियाल ने बताया कि कोटद्वार मेडिकल कॉलेज को केन्द्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल के तहत् बनाया जा सकता है। कंडी रोड़ का हिस्सा लालढांग-चिलरखाल वाले 11 किलोमीटर वाले हिस्से को वन विभाग से लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित किया जाना चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार की इच्छा शक्ति ही काफी है। सत्य प्रकाश थपलियाल की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में महेन्द्र सिंह रावत, वरिष्ठ पत्रकार सूरज कुकरेती, डॉ. शक्ति शैल कपरवाण, शिव प्रकाश कुकरेती, राजीव गौड़, मुजीब नैथानी, चित्रमणी देवलियाल, विकास आर्य आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर अनेक राज्य आंदोलनकारियों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुभाष चन्द्र नौटियाल ने किया।

सम्मानित होने वाले राज्य आंदोलनकारी
1. महेन्द्र सिंह रावत 2. भगवती प्रसाद कंडवाल 3. अशोक कंडारी 4. पंकज डबराल 5. पंकज उनियाल 6. प्रकाश बमराड़ा 6. संजू कश्यप 7. अभिमन्यु सिंह रावत 8. विजय पाल सिंह 9. विनोद अग्रवाल 10. राजीव गौड़ 11. राजेन्द्र सिंह नेगी 12. दलबीर सिंह 13. हरीश बहुखंडी 14. इकरामुद्दीन 15. रमेश चन्द्र 16. दिनेश धूलिया।

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