नई दिल्ली , गृह मंत्रालय ने 3 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक होने वाली अमरनाथ यात्रा के लिए व्यापक और कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है. यह कदम जम्मू-कश्मीर में शांति और स्थिरता को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों से जुड़े खतरों को लेकर बनी चिंताओं के बीच उठाया गया है.
आवाजाही पर नजर रखने, संभावित खतरों की पहचान करने और तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए ड्रोन, सीसीटीवी नेटवर्क, रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम और अन्य आधुनिक निगरानी उपकरणों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा.गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की और पवित्र यात्रा के लिए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की.
इस बैठक में जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, गृह मंत्रालय, भारतीय सेना, खुफिया एजेंसियों, जम्मू-कश्मीर प्रशासन और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.बैठक में यह तय किया गया कि पारंपरिक और वैकल्पिक, दोनों तीर्थ मार्गों पर व्यापक और कई स्तरों वाला सुरक्षा घेरा (सिक्योरिटी ग्रिड) तैनात किया जाएगा. सुरक्षा योजना में पारंपरिक तैनाती के साथ-साथ आधुनिक तकनीक से निगरानी की व्यवस्था भी शामिल है.
सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा, आवाजाही पर नजर रखने, संभावित खतरों की पहचान करने और तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता को मज़बूत करने के लिए ड्रोन, सीसीटीवी नेटवर्क, रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम और अन्य आधुनिक निगरानी उपकरणों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा.
सुरक्षित और सुचारू तीर्थयात्रा सुनिश्चित करने के सरकार के संकल्प पर जोर देते हुए शाह ने कहा कि प्रशासन सुरक्षा में कोई कमी नहीं छोड़ेगा और सभी एजेंसियों को श्रद्धालुओं के लिए एक एकीकृत और अभेद्य सुरक्षा घेरा बनाने के लिए आपसी तालमेल के साथ काम करना होगा.
इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले प्रवक्ता ने बताया, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीएपीएफ और अन्य एजेंसियों के सुरक्षा कर्मियों को कई चेकपॉइंट, ट्रांजिट कैंप, बेस कैंप और ट्रेकिंग रूट पर तैनात किया जाएगा.
अधिकारी ने बताया कि सीएपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी तीर्थयात्रा के दौरान अहम जगहों पर तैनात रहेंगे, ताकि वे कामकाज की निगरानी कर सकें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत फैसला ले सकें. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था पाकिस्तान स्थित उन आतंकवादी समूहों से लगातार मिल रही धमकियों को देखते हुए की गई है, जिन्होंने अतीत में इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों, नागरिकों और धार्मिक आयोजनों को निशाना बनाने की कोशिश की है.
घुसपैठ की कोशिशों, आतंकवादी हमलों या तीर्थयात्रियों के बीच डर पैदा करने की कोशिशों की आशंका को देखते हुए खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं.अधिकारी के अनुसार, सुरक्षा रणनीति को पारंपरिक और उभरते हुए खतरों – जिनमें दुश्मन तत्वों द्वारा ड्रोन और अन्य तकनीकों का संभावित दुरुपयोग भी शामिल है – से निपटने के लिए तैयार किया गया है. सुरक्षा उपायों के अलावा, अधिकारी तीर्थयात्रियों के लिए सहायता प्रणालियों को भी मजबूत कर रहे हैं. पंजीकरण, ठहरने की व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन के लिए इंतजाम किए जा रहे हैं.
अधिकारियों ने बैठक में बताया कि यात्रा के दौरान इस्तेमाल होने वाले स्थानीय सर्विस प्रोवाइडर्स और जानवरों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा और वेरिफिकेशन व निगरानी को बेहतर बनाने के लिए उन्हें क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र जारी किए जाएंगे. यात्रा में शामिल जानवरों की सेहत सुनिश्चित करने के लिए पशु चिकित्सा कैंप भी लगाए जाएंगे.
गृह मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि तीर्थयात्रियों के काफिले की आवाजाही को मौजूदा मौसम की स्थिति और पूर्वानुमान के अनुसार नियंत्रित किया जाना चाहिए.गौरतलब है कि जुलाई 2022 में अमरनाथ यात्रा के ऊपरी इलाकों में बादल फटने से अचानक बाढ़ आ गई थी, जिसमें कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई थी. शुक्रवार की बैठक में यह भी तय किया गया कि जम्मू-कश्मीर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा बढ़ाई जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यात्रा के मौसम में पर्यटक सुरक्षित और बेफिक्र होकर घूम सकें. अनुमान है कि इस साल अमरनाथ यात्रा 2026 पर जाने वाले तीर्थयात्रियों की कुल संख्या 3.5 लाख से ज़्यादा हो सकती है. पिछले साल अमरनाथ तीर्थयात्रियों की संख्या लगभग 2.86 लाख दर्ज की गई थी.