इस्लामाबाद में एससीओ बैठक में शामिल हुआ भारत, पाकिस्तान संग सीमा सुरक्षा पर हुई चर्चा

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नईदिल्ली, पाकिस्तान से तनाव के बावजूद बहुपक्षीय मंचों पर भारत की भागीदारी लगातार जारी है। भारत ने शुक्रवार को इस्लामाबाद में पाकिस्तान की अध्यक्षता में हुई शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सीमा सुरक्षा प्रमुखों की 12वीं बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक में बेलारूस, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, चीन, किर्गिज गणराज्य, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान के अधिकारी और प्रतिनिधि भी शामिल हुए। बैठक में सदस्य देशों के बीच सीमा सुरक्षा, संयुक्त अभियान और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के मुताबिक, यह चर्चा एससीओ देशों के सीमा सेवाओं के प्रमुखों की 12वीं बैठक के दौरान हुई, जिसकी अध्यक्षता पाकिस्तान ने की। बैठक का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सुरक्षा हालात का जायजा लेना और उभरते खतरों के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करना था।
बयान के अनुसार, प्रतिनिधियों ने एससीओ देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर स्थिति, इसके विकास से संबंधित रुझानों और पूर्वानुमानों के बारे में जानकारी और आकलन का आदान-प्रदान किया।
देशों ने एससीओ देशों की सीमा एजेंसियों द्वारा किए गए संयुक्त सीमा अभियान सॉलिडैरिटी-2025 के नतीजों की समीक्षा की और उन्हें मंजूरी दी।
देशों ने सॉलिडैरिटी-2026 के आयोजन के लिए रोडमैप पर सहमति जताई और सीमा सेवा विशेषज्ञों के समूह के लिए 2027 की कार्य योजना का समर्थन किया।
बैठक में सॉलिडैरिटी-2027 की मेजबानी करने के ताजिकिस्तान के प्रस्ताव का समर्थन किया गया।
देशों ने सीमा सेवाओं के प्रमुखों की अगली बैठक के लिए तारीख-जगह पर भी चर्चा की।
पाकिस्तान सितंबर, 2026 से अगस्त, 2027 तक एससीओ की अध्यक्षता संभाल रहा है। इस दौरान वो राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी करेगा।
भारत-पाकिस्तान के रिश्ते सीमित होने के बावजूद भारत ने एससीओ में अपनी भागीदारी जारी रखी है। अक्टूबर, 2024 में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान में आयोजित एससीओ प्रमुखों की सरकार की बैठक में भी हिस्सा लिया था।
भारत ने 2023 में एससीओ की अध्यक्षता की थी।
एससीओ एक आर्थिक और सुरक्षा संगठन है, जिसकी स्थापना 2001 में शिखर सम्मेलन के दौरान रूस, चीन, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान द्वारा की गई थी।
2017 में भारत और पाकिस्तान भी इसके स्थायी सदस्य बन गए। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना, जिसके बाद सदस्य देशों की संख्या 9 हो गई है।
अफगानिस्तान, बेलारूस और मंगोलिया को संगठन में पर्यवेक्षक का दर्जा मिला हुआ है।
एससीओ का अहम मकसद 3 बुराइयों- अलगाववाद, आतंकवाद और कट्टरपंथ से लड़ना है।

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