श्रीनगर गढ़वाल : अलकनंदा नदी में बहे एनआईटी के बीटेक तृतीय वर्ष (कंप्यूटर साइंस) के छात्र आनंद सोहन का सोमवार को दूसरे दिन भी पता नहीं मिल पाया है। वहीं सर्च ऑपरेशन में कथित देरी और संसाधनों की कमी से आक्रोशित छात्रों ने सोमवार को संस्थान का परिसर बंद करा दिया। चिलचिलाती धूप में धरने पर बैठे छात्रों ने प्रशासन और बचाव दलों पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने तलाशी अभियान में एनडीआरएफ को शामिल करने की मांग की। देर शाम तक छात्र धरने पर डटे रहे।
मूल रूप से तेलंगाना निवासी आनंद सोहन बीते 26 अप्रैल को दोस्तों के साथ अलकनंदा नदी तट पर गए थे और नहाते समय डूब गए। दूसरे दिन भी छात्रा का पता नहीं चल पाया तो आक्रोशित छात्रों ने एनआईटी का परिसर बंद करा दिया। छात्रों ने आरोप लगाया कि सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन एसडीआरएफ के पास करीब डेढ़ घंटे तक कोई उपकरण नहीं था। बचाव दल यात्रा ड्यूटी में व्यस्त होने का हवाला देता रहा। अमन ने कहा कि हमने उसे बचाने का काफी प्रयास किया लेकिन बचा नहीं पाए। छात्रों ने रोष जताया कि अलकनंदा किनारे स्थित होने और कॉलेज में एडवेंचर क्लब होने के बावजूद संस्थान के पास आपात स्थिति के लिए लाइफ जैकेट तक नहीं है। छात्र सर्वेश ने कहा कि उपजिलाधिकारी मौके पर आएं और संस्थान के डायरेक्टर से बात कर स्पष्ट करें कि अब तक बचाव कार्य में क्या हुआ है। हर्षित त्रिपाठी ने गोताखोरों की संख्या बढ़ाने, रेस्क्यू बोट की व्यवस्था मजबूत करने और तत्काल एनडीआरएफ को बुलाने की मांग की। सार्थक ने बताया कि बचाव दल बोट और हुक की मदद से तलाश कर रहा है। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने शाम होते ही सर्च अभियान रोक दिया। छात्रों के हंगामे की सूचना पर श्रीनगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक कुलदीप सिंह धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों को आश्वस्त किया कि पुलिस और एसडीआरएफ की ओर से छात्र को खोजने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। हालांकि छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे और वार्ता बेनतीजा रही। धरने पर हेमंत मुनि, आशुतोष सिंह, नमन पंवार, अक्षय मीणा, ऋतिक शिवालय और कुशाग्र पांडेय समेत बड़ी संख्या में छात्र डटे हुए हैं। वहीं पुलिस और एसडीआरएफ का कहना है कि घटना के बाद से ही लगातार सर्च ऑपरेशन जारी है। राफ्ट और गोताखोरों की मदद से नदी के अलग-अलग हिस्सों में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। (एजेंसी)