राष्ट्रीय मिशन के तहत देश में 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र स्थापित; 1,136 स्टार्टअप को मिला प्रोत्साहन, 2.46 लाख से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षण
नई दिल्ली, , डिजिटल और भौतिक दुनिया के बीच तालमेल स्थापित करने वाली साइबर-फिजिकल सिस्टम (सीपीएस) तकनीक भारत के तकनीकी भविष्य को नई दिशा दे रही है। सेंसर, सॉफ्टवेयर और संचार नेटवर्क के माध्यम से सीपीएस मशीनों को अपने आसपास के वातावरण को समझने, सूचनाओं का विश्लेषण करने और परिस्थितियों के अनुसार तुरंत प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाता है। चालक रहित वाहन, स्मार्ट कारखाने, आधुनिक चिकित्सा उपकरण, स्मार्ट भवन और रोबोटिक उपकरण इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
भारत ‘इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशनÓ (एनएम-आईसीपीएस) के माध्यम से इस क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा लागू इस मिशन को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2018 में मंजूरी दी थी। इसके लिए नौ वर्षों में 3,660 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
अनुसंधान से उत्पाद विकास तक पर जोर
एनएम-आईसीपीएस अकादमिक संस्थानों, उद्योग, सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को एक साझा मंच पर लाकर वैज्ञानिक अनुसंधान को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और औद्योगिक जरूरतों से जोड़ता है। मिशन के तहत अनुसंधान एवं विकास, अनुवादात्मक अनुसंधान, उत्पाद विकास और स्टार्टअप के पोषण से लेकर प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण तक की पूरी प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मिशन के अंतर्गत देशभर में विश्वस्तरीय अंतर्विषयक उत्कृष्टता केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। ये केंद्र उन्नत अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, विशेषज्ञता निर्माण और नीतिगत सुझाव उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
देशभर में 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र
एनएम-आईसीपीएस के तहत सरकार ने प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र (टीआईएच) स्थापित किए हैं। ये केंद्र चार प्रमुख क्षेत्रों में काम कर रहे हैं—प्रौद्योगिकी विकास, मानव संसाधन एवं कौशल विकास, नवाचार एवं उद्यमिता तथा स्टार्टअप विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग।