6 माह में भरें वन विभाग के खाली पद : हाईकोर्ट

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नैनीताल। हाईकोर्ट ने प्रदेश के जंगलों में लग रही आग का स्वत: संज्ञान लेकर आज राज्य सरकार को अहम दिशा निर्देश जारी करते हुए। वन विभाग में खाली पड़े 60 प्रतिशत पदों को 6 माह में भरने व ग्राम पंचायतों को मजबूत करने के साथ वर्ष भर जंगलो की निगरानी करने को कहा है। कोर्ट ने कहा है, क्या राज्य की भूगौलिक परिस्थिति को देखते हुए कृत्रिम बारिश कराना संभव है। कोर्ट राज्य सरकार को निर्देश दिए है कि जो दिशा निर्देश जारी किए गए है उनको त्वरित लागू करें। सरकार एनडीआरफ व एसडीआरफ को बजट भी मुहैय्या कराए। आग पर काबू पाने के लिए हेलीकॉटर का भी उपयोग करें। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए है कि जंगलो में जो आग लग रही उसे दो सप्ताह में बुझाएं। पर्यावरण मित्रो द्वारा कोर्ट को यह भी बताया गया कि 2017 में आग लगने से एनजीटी द्वारा 12 बिंदुओं पर एक गाइड लाइन जारी कराई थी जिस पर आज तक सरकार ने कोई अमल नही किया गया जिस पर कोर्ट सरकार को निर्देश दिए है कि उस गाइड लाइन को छ: माह के भीतर लागू करें। जंगलो में लगने वाली आग के निस्तारण के लिए स्थायी व्यवस्था करें। मामले को सुनने के बाद खण्डपीठ ने जनहित याचिका को निस्तारित कर दी है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश आरएस चौहान व न्यायमुर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में हुई। आज सुनवाई के दौरान प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी कोर्ट में वीडियो कॉंफ्रेंसनिंग के माध्यम से पेश हुए। कोर्ट ने इन द मैटर आफ प्रोटेक्शन आफ फारेस्ट एरिया फारेस्ट हेल्थ एंड वाइल्ड लाइफ जनहित याचिका के स्वत: संज्ञान लिया है। अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली व राजीव बिष्ठ ने कोर्ट के सम्मुख प्रदेश के जंगलों में लग रही आग के सम्बंध में कोर्ट को अवगत कराया। उनका कहना था कि अभी प्रदेश के कई जंगल आग से जल रहे है और प्रदेश सरकार इस सम्बंध में कोई ठोस कदम नही उठा रही है।जबकि हाइकोर्ट ने 2016 में जंगलो को आग से बचाने के लिए गाइड लाइन जारी करी थी। कोर्ट ने गांव स्तर से ही आग बुझाने के लिए कमेटियां गठित करने को कहा था जिस पर आज तक अमल नही किया गया। सरकार जहां आग बुझाने के लिए हेलीकाप्टर का उपयोग कर रही है उसका खर्चा बहुत अधिक है और पूरी तरह से आग भी नही बुझती है इसके बजाय गाँव स्तर पर कमेटियां गठित की जाय। कोर्ट ने विभिन्न पेपरों में आग को लेकर छपी खबरों का गम्भीरता से संज्ञान लिया कोर्ट ने सरकार से पूछा कि इसको बुझाने के लिए क्या क्या उपाय किए जा रहे है कोर्ट को अवगत कराएं।

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