जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक पर उक्रांद ने जताया रोष

जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : ग्राम ईड़ा श्रीकोटखाल में गुलदार के हमले की घटना के बाद उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के नेता बलबंत गुसाईं व संदीप रौतेला गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और क्षेत्र में गुलदार के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आमजन की सुरक्षा सर्वोपरि है और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार तथा संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल पहाड़ के लोगों के अधिकारों, सुरक्षा और गांवों के अस्तित्व की लड़ाई में उनके साथ खड़ा रहेगा। ग्रामीणों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि वे अपने गांवों में रहकर जीवनयापन कर सकें और पलायन की मजबूरी से बच सकें।


बलबंत गुसाईं ने ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां बरतें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उत्तराखंड क्रांति दल इस कठिन परिस्थिति में ग्रामीणों के साथ खड़ा है और उनकी समस्याओं को लेकर आवाज उठाता रहेगा। गुलदार के हमलों और पहाड़ में बढ़ती असुरक्षा को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए बलबंत गुसाईं ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “सरकार ने मानो हर गांव के लिए एक गुलदार की व्यवस्था कर रखी है। यह व्यवस्था लोगों को अपने ही गांवों और पहाड़ों से पलायन करने पर मजबूर करने की है।” उन्होंने कहा कि पहाड़ के ग्रामीण पहले से ही सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में गुलदार के हमलों का बढ़ता खतरा उनकी मुश्किलों को और बढ़ा रहा है। ग्रामीणों के लिए अपने घरों, खेतों और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षित आवाजाही करना भी चुनौती बनता जा रहा है। यूकेडी नेता संदीप रौतेला ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और संसाधनों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले वन विभाग के कर्मचारियों की संख्या पर्याप्त नहीं है और उनके पास जरूरी संसाधनों का भी अभाव है। ऐसी स्थिति में वन्यजीवों से ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि गुलदार के खतरे से निपटने के लिए वन विभाग को प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि ग्रामीण भयमुक्त होकर अपने दैनिक कार्य कर सकें। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने की आवश्यकता है। बलबंत गुसाईं ने कहा कि पहाड़ के लोगों को उनके ही गांवों में असुरक्षित छोड़ना और ऐसी परिस्थितियां पैदा होने देना, जिनसे उन्हें पलायन के लिए मजबूर होना पड़े, किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस कार्रवाई करने की मांग की।

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जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक पर उक्रांद ने जताया रोष

जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक पर चिंता जताते हुए सरकार से प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। दल के संरक्षक डॉ. शक्तिशैल कपरवाण ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कहा कि गुलदार, भालू समेत अन्य हिंसक वन्यजीव लगातार आबादी में घुसकर लोगों पर हमला कर रहे हैं, जिससे कई ग्रामीणों की जान जा चुकी है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि आदमखोर और हिंसक वन्यजीवों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों या पार्कों में रखा जाए, मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए ठोस नीति बनाई जाए तथा वन्यजीवों के हमले में मारे गए मवेशियों का मुआवजा 15 दिन के भीतर दिया जाए। इसके अलावा सूअर और बंदरों से फसल नुकसान की भरपाई, गांवों और स्कूलों के आसपास लैंटाना उन्मूलन अभियान तथा पर्वतीय किसानों को ग्रीन बोनस देने की भी मांग की गई है।

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