आचार्य विनोबा भावे की 135वीं जयन्ती धूमधाम से मनाई

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। सर्वोदय मंडल कोटद्वार के तत्वाधान में सर्वोदय केन्द्र हल्दूखाता में भूदान आंदोलन के प्रणेता आचार्य विनोबा भावे की 135वीं जयन्ती धूमधाम के साथ मनाई गई। शशि प्रभा रावत ने कहा कि आचार्य विनोबा भावे ऐसे इंसान थे, जिन्होंने अपने निजी फायदा-नुकसान की चिंता किए बिना देश सेवा में अपना जीवन व्यतीत कर दिया। उन्होंने अपने बलिदान और कर्म भावना से देशभक्ति की नई मिसाल पैदा की।
कार्यक्रम में मंडल के सदस्यों ने आचार्य विनोबा भावे के चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्वोदय सेविका शशि प्रभा रावत ने कहा कि सन 1916 में विनोबा भावे से पहली मुलाकात साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी से हुई। गांधी से प्रभावित होकर वे स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े, कई बार जेल गए। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उन्होंने भूदान आंदोलन की नींव रखी और प्रथम भूदान तेलंगाना से शुरू हुई। जिसमें रामचन्द्र रेड्डी प्रथम भूदान दाता बनें। यह सिलसिला उनकी मृत्यु तक जारी रहा। उन्होंने देश में पदयात्रा निकाली, जिसमें स्व. सोहन लाल स्व. मान सिंह रावत, बलवन्त सिंह भारती व शशि प्रभा रावत भी शामिल थे। गढ़वाल सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष सुरेन्द्र लाल आर्य ने कहा कि विनाबा को मरणोपरान्त 1983 में भारत रत्न से नवाजा गया। 1958 में अन्तर्राष्ट्रीय रेमन मैगसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होेंने कहा कि आर्चाय विनोबा ने भूदान आंदोलन चलाकर भूमिहीनों को मुख्य धारा में लाने का काम किया। देश के महान व्यक्तियों में विनोबा भावे एक ऐसा नाम है, जिसने भारतीय समाज को एक नई दिशा और चेतना प्रदान की। प्रतिभा के धनी वे मौलिक चिन्तक, दार्शनिक, समाजसेवी और लेखक भी थे। भूदान और सर्वोदय आन्दोलन के द्वारा उन्होंने देश की महान सेवा की। कार्यक्रम में डॉ. सबल सिंह, कर्नल विमला रावत, श्रीमती मंजू रावत, विनय रावत, डॉ. शील सौरभ, श्रीमती श्रद्धा आदि उपस्थित रहे।

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