देहरादून। पटेलनगर थाना क्षेत्र के मेहूंवाला माफी गांव में जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इंफिनिटी वेलनेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि समेत पांच लोगों ने सहखातेदार कमरुद्दीन उर्फ नसरुद्दीन और उसके पुत्र जमील अहमद पर जमीन का सौदा करने के बाद बड़ी रकम लेने, रजिस्ट्री से मुकरने और पूर्व में निष्पादित मुख्तारनामे (जीपीए) को कथित तौर पर निरस्त कराने का आरोप लगाया है।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, जमीन की कुल सौदा राशि 2 करोड़ 20 लाख 7 हजार रुपये तय हुई थी, जिसमें से 2 करोड़ 12 लाख 36 हजार रुपये विभिन्न माध्यमों से आरोपी को दिए जा चुके थे। शेष 7 लाख 71 हजार रुपये का भुगतान रजिस्ट्री के समय किया जाना था। मामला सामने आने के बाद पटेलनगर पुलिस ने तहरीर में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है।
0.1813 हेक्टेयर जमीन का था सौदा
पटेलनगर थाने में दी गई तहरीर के अनुसार, सलीम अहमद, आबिद अली, नसीम अहमद, वसीम अहमद और इंफिनिटी वेलनेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि ऋषभ जैन ने वर्ष 2023 में मेहूंवाला माफी गांव स्थित 0.1813 हेक्टेयर भूमि का सौदा कमरुद्दीन उर्फ नसरुद्दीन के साथ तय किया था।
शिकायत में बताया गया है कि जमीन की कुल कीमत 2,20,07,000 निर्धारित हुई थी। सौदे के तहत भुगतान अलग-अलग माध्यमों से किया गया।
चेक, आरटीजीएस, नकद और प्लॉट से भुगतान
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने आरोपी को चेक, आरटीजीएस और नकद के अलावा 236 वर्ग गज का एक प्लॉट देकर कुल 2,12,36,000 का भुगतान किया।
शेष 7,71,000 बैनामा यानी जमीन की अंतिम रजिस्ट्री के समय दिया जाना तय था। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, भुगतान के बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़नी थी।
24 सितंबर 2024 को बने थे दो जीपीए
तहरीर के मुताबिक, सौदे के दौरान कमरुद्दीन ने 24 सितंबर 2024 को सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में शिकायतकर्ताओं और अतुल नामक व्यक्ति के पक्ष में दो अलग-अलग मुख्तारनामे (जीपीए) निष्पादित किए थे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इन दस्तावेजों के बाद उन्हें जमीन की रजिस्ट्री पूरी होने की उम्मीद थी, लेकिन बाद में विवाद खड़ा हो गया।
16 नवंबर को जीपीए निरस्त
कराने का आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, जब अंतिम रजिस्ट्री का समय आया तो आरोपी पक्ष कथित तौर पर अपने वादे से पीछे हट गया। आरोप है कि 16 नवंबर 2024 को दोनों जीपीए बिना पूर्व सूचना के निरस्त करा दिए गए।
शिकायतकर्ताओं को इसकी जानकारी कथित तौर पर बाद में व्हाट्सऐप नोटिस के माध्यम से हुई। इसके बाद उन्होंने आरोपी से संपर्क कर रकम वापस करने अथवा जमीन की रजिस्ट्री करने की मांग की, लेकिन आरोप है कि दोनों मांगों से इनकार कर दिया गया।
पुलिस में जाने पर धमकी का आरोप
तहरीर में शिकायतकर्ताओं ने कमरुद्दीन और उसके पुत्र जमील अहमद पर कथित रूप से धमकी देने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि रकम वापस मांगने और पुलिस में शिकायत करने की बात कहने पर उन्हें जान से मारने तथा भाड़े के लोगों से उठवा लेने की धमकी दी गई।
शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से मामले की गंभीरता से जांच कर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
दस्तावेज और भुगतान रिकॉर्ड
खंगाल रही पुलिस
पटेलनगर पुलिस मामले से जुड़े जमीन के दस्तावेज, जीपीए, भुगतान के रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि जमीन के सौदे की वास्तविक स्थिति क्या थी और शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं।
फिलहाल मामले में पुलिस जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।