संसद में पैम्फलेट के वितरण और तख्तियों के इस्घ्तेमाल पर रोक, जारी हुई एडवाइजरी

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नई दिल्ली, एजेंसी। संसद के मानसून सत्र के हंगामेदार होने की बानगी नजर आने लगी है। गुरुवार को राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी एक सर्कुलर में संसद परिसर में धरना, विरोध प्रदर्शन, अनसन आदि की अनुमति नहीं होने की बात कही गई है। हालांकि इसे नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है फिघ्र भी विपक्ष इसे लोकतंत्र की आवाज को कुचलने का कदम बता रहा है। इस विवाद के बीच लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी किया गया एक और सर्कुलर सामने आया है।
रिपोर्ट के मुताबिक संसद के मानसून सत्र से पहले आए इस पत्रक में लोकसभा सदस्यों को सलाह दी गई है कि वे सदन में किसी भी पर्चे, पत्रक या तख्ती के वितरण से परहेज करें। एडवाइजरी में कहा गया है कि स्थापित परंपरा के अनुसार, सदन में कोई भी साहित्य, प्रश्नावली, पैम्फलेट, प्रेस नोट या मुद्रित सामग्री माननीय अध्यक्ष की पूर्व अनुमति के बिना वितरित नहीं की जानी चाहिए। संसद भवन परिसर के अंदर तख्तियां भी सख्त वर्जित हैं।
यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दलों ने संसद परिसर के भीतर प्रदर्शन और धरने की अनुमति नहीं दिए जाने की एडवाइजरी का विरोध किया है। सांसदों के लिए जारी सलाह में कहा गया है कि सदस्य किसी भी धरना प्रदर्शन, हड़ताल, अनसन या किसी धार्मिक समारोह के लिए सदन के परिसर का उपयोग नहीं कर सकते हैं। पूर्व में ऐसे कई उदाहरण हैं जब सदन में विपक्षी सदस्यों को तख्तियां लहराते हुए देखा गया है।
हाल के कुछ सत्रों में राज्यसभा में ऐसे दृश्य देखे गए जब सदस्य पूरी कार्यवाही के दौरान तख्तियां लिए नजर आए। कभी-कभी तख्तियां और पर्चे फाड़कर अध्घ्यक्ष की कुर्सी की ओर भी उछालने की घटनाएं हुई हैं। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश समेत कई संसदों ने इन कदमों की आलोचना की है। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का सर्कुलर निकाला गया है। यूपीए शासन के दौरान भी कई ऐसे परिपत्र सार्वजनिक डोमेन में नजर आ चुके हैं।

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