नई टिहरी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की दुर्लभ पांडुलिपि विरासत के संरक्षण व डिजिटलिकरण के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की ओर से शुरू ज्ञान भारतम् मिशन के तहत देश के प्रमुख 17 संस्थानों के साथ समझौता किया गया है। उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध संस्था नक्षत्र वेधशाला देवप्रयाग को इसके तहत कलस्टर केंद्र बनाकर समझौता किया गया है। नई दिल्ली स्थित मॉडर्न आर्ट गैलरी में आयोजित समारोह में केंद्रीय संस्कृति पर्यटन मंत्री गजेन्द्र शेखावत, संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल, संयुक्त सचिव समर नंदा, निदेशक इंद्रजीत सिंह, परियोजना निदेशक अनिर्वाण दास की उपस्थिति में इस समझौते में हस्ताक्षर किए गए। नक्षत्र वेधशाला की ओर से डॉ. प्रभाकर जोशी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने बताया कि संस्कृति मंत्रालय द्वारा आगामी पांच वर्षों में इसके तहत उत्तराखंड की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक बहुमूल्य पांडुलिपि धरोहर की खोज, संरक्षण, डिजिटलीकरण, संपादन, प्रकाशन आदि का काम किया जायेगा। कलस्टर केंद्र के तौर पर नक्षत्र वेधशाला देवप्रयाग प्रदेश की अन्य प्रमुख संस्थाओं, निजी पांडुलिपि संग्रहकर्ताओं के साथ समन्वय कर कार्य करेगा। संस्कृति मंत्रालय इसके लिए आवश्यक फंड व तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा। मंत्रालय पांडुलिपियों का राष्ट्रीय डिजिटल भंडार भी स्थापित करेगा। ज्ञान भारतम् के तहत नक्षत्र वेधशाला देवप्रयाग सहित कश्मीर विवि, केंद्रीय बौद्ध अध्ययन केंद्र लेह, हिमाचल राज्य संग्रहालय शिमला, द एशियाटिक सोसाइटी कोलकाता, वृन्दावन शोध संस्थान, असम विवि सिलचर, सनातन ट्रस्ट तिरुपति, हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयागराज, नागरी प्रचारिणी सभा वाराणसी, आनंद आश्रम पुणे, नव नलांदा विवि बिहार, डॉ. एसएस गौड़ विवि सागर मप्र आदि समझौते में शामिल हैं। (एजेंसी)