आंदोलन व विपक्षी दलों को बदनाम करने की कोशिश कर रही सरकार

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देहरादून। ह्यूमन राइट्स एंड आरटीआई एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद शर्मा एवं महासचिव भास्कर चुग ने आज मीडिया से बात करते हुए कहा कि किसी भी आंदोलन को देशद्रोही कहने का अधिकार सरकार को नहीं है और ना ही विपक्षी दलों के आंदोलन को समर्थन करने पर सवाल उठाने का अधिकार किसी सरकार को होता है। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस की सरकार होती थी या अन्य विपक्षी दल सरकार में होते थे तब भारतीय जनता पार्टी खुद सभी आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी भी करती थी और उनका समर्थन भी करती थी जिसका उदाहरण जेपी आंदोलन से लेकर राम मंदिर आंदोलन तक है जिसमें खुद लालकृष्ण आडवाणी ने रथयात्रा निकाली थी और इसके साथ ही अन्ना हजारे के आंदोलन में और बाबा रामदेव के आंदोलन में भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस के लोगों ने सक्रिय भागीदारी की लेकिन तत्कालीन सरकार ने उनको ना तो नक्सलवादी कहा और ना ही उनको देशद्रोही कहा। तत्कालीन सरकारें आंदोलन को आंदोलन ही समझती थी और आंदोलन को बदनाम करने का कभी कोई प्रयास तत्कालीन सरकारों ने नहीं किया। जबकि वर्तमान सरकार खुलेआम आंदोलन को भी बदनाम करने की कोशिश करती है और साथ ही विपक्षी दलों को भी बदनाम करने की कोशिश करती है। सरकार के मंत्रियों से लेकर अदने से समर्थकों तक का कोई भी बयान बिना चीन-पाकिस्तान देशद्रोह नक्सलवाद खालिस्तान अर्बन नक्सल अल्ट्रा लेफ्टिस्ट जैसे शब्दों का इस्तेमाल किए बिना पूरा नहीं होता जो कि बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
यह किसान इस देश के नागरिक हैं जिसकी संतान सीमा पर इस देश की सुरक्षा करती है और शहीद भी होती है ऐसे इस देश के नागरिक को देशद्रोही कहकर सरकार इस देश के नागरिक का अपमान करती है। साथ ही तमाम विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता भी इस देश के नागरिक हैं और इस देश के नागरिक को देशद्रोही कहने का अधिकार किसी को भी नहीं है वर्तमान सरकार लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा रही है सरकार का विरोध देशद्रोह नहीं होता बल्कि लोकतंत्र ही वही है जिसमें सरकार का विरोध करने का अधिकार हो। इसलिए भविष्य में कोई भी बयान सरकार के लोग यदि जारी करते हैं तो इस देश के नागरिक को देशद्रोही ना कहें इस को सहन नहीं किया जाएगा। इस मौके पर अरविंद शर्मा और भास्कर चुग के साथ राहुल प्रियंका गांधी सेना के शहर अध्यक्ष सोमदत्त जाटव ‘देशप्रेमी’ एवं जिला महासचिव वीरेंद्र सिंह उपस्थित रहे।

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