नई दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। 16 अक्टूबर 2026 को अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और माता सोनी देवी दिल्ली स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपनी बात रखी और निष्पक्ष एवं गहन जांच की मांग की।परिवार की इस मुलाकात के बाद अब सभी की नजरें उइक की जांच पर टिकी हैं। अधिकारियों ने परिजनों को आश्वासन दिया कि मामले के सभी पहलुओं का समुचित परीक्षण किया जाएगा और जांच निष्पक्ष एवं न्यायसंगत तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी।
कथित वीआईपी एंगल की
जांच की मांग
अंकिता भंडारी प्रकरण में कथित श्कढ की भूमिका को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। परिवार और इस मामले में न्याय की मांग कर रहे लोगों की प्रमुख मांग है कि इस पहलू की भी गहराई से जांच हो तथा तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उइक अधिकारियों से मुलाकात के दौरान अंकिता के माता-पिता ने पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर के नार्को टेस्ट की मांग भी उठाई। इस मांग का उद्देश्य मामले से जुड़े सवालों की जांच के जरिए सच्चाई सामने लाना बताया गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका या संलिप्तता का निर्धारण जांच में सामने आने वाले प्रमाणों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।
इंडिया गेट पर प्रदर्शन के बाद सीबीआई तक पहुंचा परिवार
मुख्यालय में मुलाकात से दो दिन पहले, 14 अक्टूबर को अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली के इंडिया गेट के पास अपनी बेटी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान मामला राष्ट्रीय स्तर पर फिर चर्चा में आया। परिवार की मांगों के समर्थन में विपक्ष के कुछ नेता भी सामने आए।परिवार लगातार यह चाहता है कि मामले से जुड़े हर सवाल की जांच हो और किसी भी संभावित पहलू को नजरअंदाज न किया जाए। उइक अधिकारियों से मुलाकात को इसी प्रयास की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
2022 के हत्याकांड में तीन दोषियों को मिल चुकी है उम्रकैद
अंकिता भंडारी ऋषिकेश के निकट एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या का मामला सामने आया था।
इस प्रकरण में रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को अदालत ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बावजूद कथित श्कढ एंगल को लेकर उठ रहे सवालों के कारण मामला एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा में है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कथित श्कढ की भूमिका से संबंधित आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। इस संबंध में निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
अब जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें
अंकिता के माता-पिता की मांग है कि जांच में पारदर्शिता बरती जाए और मामले से जुड़े सभी पहलुओं को गंभीरता से परखा जाए। परिवार को उम्मीद है कि उइक की जांच से उठ रहे सवालों का जवाब मिलेगा और तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी। अंकिता भंडारी प्रकरण केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह न्याय, महिलाओं की सुरक्षा और जांच प्रक्रिया में जनता के विश्वास से जुड़ा संवेदनशील विषय बन चुका है। ऐसे में जांच एजेंसी की जिम्मेदारी है कि वह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच करे तथा कानून के अनुरूप आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करे।