देहरादून। 300 मेगावाट की लखवाड़ जलविद्युत परियोजना में कार्यरत श्रमिकों का अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक बार फिर धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया है। श्रमिकों का कहना है कि अपनी समस्याओं के समाधान के लिए वे लंबे समय से संबंधित विभागों और अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन बार-बार बैठकें होने और आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे श्रमिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
श्रमिकों के अनुसार, उनकी समस्याओं को लेकर उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड , उपजिलाधिकारी, श्रम आयुक्त देहरादून और संबंधित अधिकारियों के साथ कई बार बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों के दौरान समस्याओं के समाधान के लिए समय भी दिया गया, लेकिन श्रमिकों का आरोप है कि निर्धारित समय बीतने के बाद भी उनकी मांगों पर कोई स्पष्ट एवं प्रभावी निर्णय सामने नहीं आया है।
भूमिगत टनल में काम करने वाले
श्रमिकों की समस्याएं
श्रमिकों का कहना है कि वे पिछले करीब तीन वर्षों से कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। विशेष रूप से भूमिगत टनल में कार्य करने वाले श्रमिकों को काम के दौरान धूल, गैस और अन्य जोखिमपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में वे परियोजना भत्ता, धूल एवं गैस भत्ता और कार्य की परिस्थितियों के अनुरूप अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।
श्रमिकों का कहना है कि भूमिगत निर्माण कार्य में सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। कार्यस्थल पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, उचित सुविधाएं और नियमानुसार मिलने वाले लाभ सुनिश्चित करना संबंधित प्रबंधन की जिम्मेदारी है।
उनका आरोप है कि इन मुद्दों को कई बार अधिकारियों के सामने उठाया गया, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं मिल पाया है। इसी कारण श्रमिकों को दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।