चकराता/देहरादून। जौनसार-बावर के सड़कविहीन उदांवा गांव तक सड़क पहुंचने की उम्मीद अब जग गई है। बुल्हाड़ गांव से बारात के साथ करीब 18 किलोमीटर का दुर्गम रास्ता पैदल तय कर ससुराल पहुंची दुल्हन शर्मिला की गुहार पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण निर्माण विभाग को सड़क निर्माण के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। इस पहल से लंबे समय से सड़क सुविधा की बाट जोह रहे ग्रामीणों में उम्मीद जगी है।
18 किलोमीटर का दुर्गम
सफर बना चर्चा का विषय
चकराता तहसील के बुल्हाड़ गांव की शर्मिला का विवाह उदांवा गांव निवासी अनिल के साथ हुआ। विवाह के बाद जब शर्मिला बारात के साथ अपनी ससुराल के लिए रवाना हुईं, तो सड़क नहीं होने के कारण उन्हें करीब 18 किलोमीटर का दुर्गम रास्ता पैदल तय करना पड़ा। बताया गया कि इस सफर में लगभग चार घंटे लगे। दुल्हन की यह यात्रा क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर करने वाली घटना बन गई।
मुख्यमंत्री तक पहुंची ग्रामीणों की मांग
पैदल सफर के दौरान शर्मिला ने उदांवा गांव तक मोटर मार्ग बनवाने की मांग उठाई थी। यह मामला मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचा। मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लेते हुए ग्रामीण निर्माण विभाग को सड़क निर्माण के संबंध में निर्देश दिए हैं।
सड़क बनने से ग्रामीणों
को मिलेगी बड़ी राहत
उदांवा गांव तक सड़क पहुंचने से ग्रामीणों को आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और दैनिक जरूरतों से जुड़ी सुविधाओं में राहत मिलने की उम्मीद है। पहाड़ी क्षेत्र में सड़क केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। शर्मिला की गुहार के बाद शासन स्तर पर हुई पहल से ग्रामीणों को उम्मीद बंधी है कि अब उदांवा तक सड़क पहुंचाने का सपना साकार हो सकेगा। हालांकि, ग्रामीणों की वास्तविक राहत सड़क निर्माण कार्य शुरू होने और पूरा होने पर निर्भर करेगी।