बढ़ेगी चीन की टेंशन, ब्रह्मपुत्र नदी पर सबसे लंबे पुल बनाएगा भारत, जुड़ जाएंगे वियतनाम और भूटान

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नई दिल्ली, एजेंसी। सीमा के नजदीक तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की बड़ी पनबिजली परियोजना निर्माण की बात पर भारत सचेत हो गया है। भारत सीमाओं पर मजबूत सड़क नेटवर्क खड़ा करने की कड़ी में ब्रह्मपुत्र नदी पर देश का सबसे लंबा सड़क पुल बनाने जा रहा है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इसके निर्माण की मंजूरी दे दी है। समाचार एजेंसी आइएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, एक पुल विशाल ट्रांस-एशियाई गलियारे एक बड़ा लिंक होगा जो वियतनाम में डेन नंग के साथ, भूटान और पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने का काम करेगा। इससे चीन की टेंशन बढ़नी तय मानी जा रही है़.़
विशाल परियोजना भारत और जापान के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को प्रदर्शित करेगी। यह परियोजना क्षेत्र में चीन के अतिक्रमण की काट होगी। भारत की यह महत्वाकांक्षी परियोजना कई आसियान देशों खास तौर पर म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया और लाओस को मजबूती देगी। असम से मेघालय को जोड़ने वाले इस पुल की लंबाई 19 किलोमीटर बताई जाती है। पुल के बनने से असम के धुबरी से मेघायल का फुलबारी जुड़ जाएगा। यही नहीं इससे त्रिपुरा, बराक वैली आदि क्षेत्र आवागमन सुलग हो जाएगा।
दरअसल, चीन के ब्रह्मपुत्र नदी के एक हिस्से पर बांध बनाए जाने की खबरें सामने आने के बाद भारत बेहद सतर्क हो गया है। चीन की परियोजना की काट के लिए ही भारत ब्रह्मपुत्र नदी पर अरुणाचल प्रदेश में 10 गीगावाट की पनबिजली परियोजना लगाने की योजना बना रहा है। ब्रह्मापुत्र नदी जिसे चीन में यारलुंग त्सांगबो के नाम से जानते हैं़.़ यह तिब्बत से निकलकर अरुणाचल प्रदेश और असम होते हुए बांग्लादेश तक चली जाती है। चीन के बांध बनाने से भारतीय इलाकों में बाढ़ की आशंकाएं हैं। यही कारण है कि चीन के बांध से उत्पन्न प्रभाव को कम करने के लिए भारत को भी अरुणाचल में एक बड़ा बांध बनाना पड़ेगा। भारत इस पर फैसला ले चुका है। इस बीच विदेश मंत्रालय के प्रवक्घ्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि ब्रह्मपुत्र मामले को लेकर भारत संजीदा है। भारतीय विदेश मंत्रालय चीन यह सुनिश्चित करने को कहा है कि अपस्ट्रीम क्षेत्रों में गतिविधियों से डाउनस्ट्रीम राज्यों के हितों को चोट नहीं पहुंचनी चाहिए। हमारी बात पर चीनी पक्ष पहले कई मौकों पर हमको अवगत करा चुका है कि वे केवल नदी जल विद्युत परियोजनाओं का संचालन कर रहे हैं। इसमें ब्रह्मपुत्र के पानी का डायवर्जन शामिल नहीं है।

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