कोलकाता , बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन 19 साल बाद पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता लौट आई हैं। यहां नसरीन रवींद्र सदन में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम में शामिल होंगी। अपनी रचनाओं के कारण भारी विरोध देखने वाली नसरीन ने 1994 में बांग्लादेश छोड़ा था और तब से निर्वासन झेल रहीं हैं। वह शुक्रवार को सीधे न्यूयॉर्क से कोलकाता पहुंची हैं, जहां उनकी आत्मकथा का विमोचन होगा। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, नसरीन ने शहर आने से पहले आशा व्यक्त की थी कि यह यात्रा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति की आवाज़ों के संरक्षण के महत्व को पुन: स्थापित करेगी।
उन्होंने कहा, कोलकाता शहर में लौटना अपने देश में लौटने जैसा अहसास है, बंगाल के पूर्वी हिस्से का दरवाजा मेरे लिए बंद है, इसलिए फिलहाल बंगाल का यही हिस्सा मेरा घर है। मैं एक अजनबी या मेहमान के रूप में नहीं लौट रही हूं।
बांग्लादेशी लेखिका-कार्यकर्ता नसरीन लज्जा किताब के कारण बांग्लादेश छोड़कर कोलकाता आई थीं, लेकिन 2003 में जब उनकी आत्मकथा द्विखोन्दितो प्रकाशित हुई, तो इसने विवाद खड़ा कर दिया।
ऐसा माना जाता है कि किताब ने मुस्लिम भावनाओं को ठेस पहुंचाया। किताब को लेकर कोलकाता में काफी बवाल हुआ। आगजनी-हिंसा के बीच भारतीय सेना बुलानी पड़ी।
तत्कालीन सरकारों ने किताब को प्रतिबंधित कर दिया, लेकिन कोर्ट से मंजूरी पर फिर हालात बिगड़ गए।
इसके बाद नसरीन को 2007 में कोलकाता छोड़ना पड़ा।