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घरेलू गैस कीमतों में स्थिरता के नए दौर की शुरुआत, मोदी सरकार ने किरीट पारिख समिति की रिपोर्ट को दिखाई हरी झंडी

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नई दिल्ली , एजेंसी। घरेलू फील्डों से निकाले जाने वाली गैस की कीमत तय करने को लेकर कैबिनेट के ताजा फैसले पर सरकार लंबे समय तक अमल में करना चाहती है। वजह यह है कि यह ना सिर्फ देश में सीएनजी व पीएनजी की खपत को बढ़ावा देगा बल्कि घरेलू बाजार में गैस कीमतों को लेकर एक स्थिरता बना कर रखेगा।
इस फैसले से देश में सीएनजी व पीएनजी की कीमतों में 11 फीसद तक की कमी आने की संभावना जताई जा रही है। सीएनजी व पीएनजी की कीमतों में कटौती को देखते हुए भाजपा भी इसे चुनावी साल में खूब प्रचारित करने की योजना बना कर चल रही है।
कैबिनेट ने किरीट पारिख समिति की रिपोर्ट के कुछ हिस्से को स्वीकार करते हुए ही नई कीमत नीति को मंजूरी दी है। अगर समिति की पूरी सिफारिशें लागू की गई जाती तो घरेलू गैस की कीमतों में और वृद्धि हो जाती। माना जा रहा है कि पिछले एक वर्ष में पीएनजी व सीएनजी की कीमतों में भारी वृद्धि के मद्देनजर केंद्र सरकार चुनावी साल में इन दोनो में और वृद्धि करने का जोखिम नहीं लिया है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने गुरुवार को जो फैसला किया है उसके मुताबिक देश के पुराने गैस फील्डों से निकालने जाने वाली प्राकृतिक गैस की कीमत हर महीने तय होगी।
यह कीमत हर महीने जिस दर पर भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल की खरीद करता है उसकी 10 फीसद होगी। लेकिन इसकी सीमा चार डॉलर से 6.50 डॉलर प्रति यूनिट ही होगी।
यानी क्रूड की खरीद बहुत ज्यादा कीमत पर हो तब भी घरेलू कीमत 6.50 डॉलर से ज्यादा नहीं होगी और क्रूड कीमत में भारी गिरावट आ जाए तब भी यह चार डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (मिलियन मैट्रिक ब्रिटिश थर्मल यूनिट- गैस मापने की इकाई) से कम नही होगी। फार्मूला लागू होने से अभी जिन फील्डों से कंपनियों को 8.57 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू दी जा रही है वह घट कर 6.50 डॉलर हो जाएगी। भाजपा की तरफ से बताया गया है कि इस फैसले दिल्ली में सीएनजी की कीमत 5.97 रुपये प्रति किलो घट कर 73.59 रुपये और पीएनजी की कीमत छह रुपये घट कर 47.59 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी।
पीएम नरेन्द्र मोदी ने इस फैसले के बारे में अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा है कि, “इस फैसले से घरेलू उपभोक्ताओं को कई तरह के फायदे होंगे। यह पूरे सेक्टर के लिए एक सकारात्मक कदम है।” पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि,”अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में भारी उतार चढ़ाव से ग्राहकों को बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।” उन्होंने आगे कहा कि इससे फर्टिलाइजर सब्सिडी के बोझ को कम करने और घरेलू बिजली सेक्टर को भी फायदा होगा क्योंकि उन्हें सस्ती दर पर गैस मिलेगी। यह देश की इकोनोमी में गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने में सहयोग करेगा और कार्बन उत्सर्जन की कमी आएगी।
हरदीप सिंह पुरी ने आगे कहा कि सरकार ने देश की इकोनोमी में गैस की मौजूदा हिस्सेदारी 7.5 फीसद को वर्ष 2030 तक बढ़ा कर 30 फीसद करने का फैसला किया है।
क्रिसिल रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा है कि इस फैसले से पीएनजी व सीएनजी की कीमतों में 9 से 11 प्रतिशत की कमी आने वाली है। इससे देश में गैस की कीमत में काफी स्थिरता आएगी व वैकल्पिक ईंधनों के प्रति आकर्षण बढ़ेगा। अगर पहले का फार्मूला लागू होता तो गैस कीमतें मौजूदा स्तर से बढ़कर 11 डालर प्रति यूनिट हो जाती। बता दें कि बीते दो वर्षों के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गैस कीमतें काफी अस्थिर रही हैं। घरेलू बाजार में इस दौरान गैस की कीमत 1.79 डालर प्रति यूनिट से लेकर मौजूदा 8.57 डालर प्रति यूनिट रही है।
घरेलू ऑटो मोबाइल उद्योग ने गैस कीमत तय करने के फैसले का स्वागत किया है। आटोमोबाइल सेक्टर के सबसे बड़ा संगठन सियाम के प्रेसिडेंट विनोद अग्रवाल ने कहा है कि घरेलू ग्राहकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता से बचाने का फैसला देश के ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए बड़ी राहत है। इससे सीएनजी गाड़ियों की मांग बढ़ेगी और स्वच्छ ईंधन ज्यादा लोकप्रिय बनेगा।
घरेलू स्तर पर प्राकृतिक गैस के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आयातित ईंधन पर निर्भरता कम होगी। देश में तकरीबन दस हजार सीएनजी स्टेशन हैं और बिकने वाले कुल वाहनों में सीएनजी चालित वाहनों की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत है।
बीते दो वर्षों में जिस तरह से पेट्रोल व डीजल महंगा हुआ है, उसे देखते हुए बड़ी संख्या में लोगों ने सीएनजी वाहनों की खरीद शुरू कर दी है। मारुति सुजुकी, हुंडई जैसी कंपनियों की तरफ से सीएनजी से चलने वाले कई वाहन लांच किए गए हैं।

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