नई दिल्ली, भारत ने आधुनिक ड्रोन खतरों से निपटने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए स्वदेशी काउंटर स्वार्म ड्रोन प्रणाली ‘भार्गवास्त्र’ विकसित की है। यह अत्याधुनिक प्रणाली ड्रोन स्वार्म, हथियारबंद ड्रोन और आत्मघाती (लॉइटरिंग म्यूनिशन) ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है। भारतीय रक्षा कंपनी सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (एसडीएएल) द्वारा विकसित इस प्रणाली का भारतीय सेना के समक्ष नागपुर में सफल प्रदर्शन किया गया।
भार्गवास्त्र की सबसे बड़ी विशेषता इसकी हार्ड-किल तकनीक है। सामान्य एंटी-ड्रोन प्रणालियां जहां ड्रोन के संचार या जीपीएस सिग्नल को जाम करती हैं, वहीं भार्गवास्त्र सीधे लक्ष्य को भौतिक रूप से नष्ट कर देता है। इससे एक साथ हमला करने वाले ड्रोन झुंड (ड्रोन स्वार्म) के खतरे का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सकता है।
10 सेकंड में दाग सकता है 64 माइक्रो-रॉकेट
इस प्रणाली में उच्च गति से प्रतिक्रिया देने की क्षमता है। भार्गवास्त्र महज 10 सेकंड के भीतर 64 माइक्रो-रॉकेट दाग सकता है, जिससे एक साथ कई ड्रोन को निशाना बनाया जा सकता है। यह क्षमता इसे बड़े पैमाने पर होने वाले ड्रोन हमलों के खिलाफ बेहद प्रभावी बनाती है।
10 किलोमीटर दूर से करेगा ड्रोन की पहचान
भार्गवास्त्र में अत्याधुनिक रडार और सेंसर लगाए गए हैं, जो छोटे आकार के ड्रोन का भी 10 किलोमीटर की दूरी से पता लगाने में सक्षम हैं। लक्ष्य की पहचान होते ही यह प्रणाली तत्काल कार्रवाई कर ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर सकती है।
रेगिस्तान से लेकर ऊंचे पहाड़ी इलाकों तक प्रभावी
यह स्वदेशी काउंटर ड्रोन प्रणाली केवल मैदानी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। इसे इस तरह विकसित किया गया है कि यह रेगिस्तानी इलाकों, मैदानी क्षेत्रों और समुद्र तल से 5,000 मीटर तक की ऊंचाई वाले दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से कार्य कर सके। इससे सीमावर्ती और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भारतीय सेना की ड्रोन-रोधी क्षमता को महत्वपूर्ण मजबूती मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन के बढ़ते उपयोग को देखते हुए ‘भार्गवास्त्र’ भारतीय सशस्त्र बलों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वदेशी रक्षा प्रणाली साबित हो सकती है, जो भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभाएगी।