कोटद्वार-पौड़ी

वन कानून को लचीला बनाने के लिए विधानसभा में विधेयक पारित किया जाए

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : स्व. सरोजनी देवी लोक विकास समिति ने प्रदेश सरकार से वन नियमों को लचीला करने के लिए विधानसभा में शीघ्र विधेयक पारित करने की मांग की है। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि वन अधिनियम के सख्त होने से कई गांव आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा नहीं जुड़ पाए है। जिस कारण गांवों से लगातार पलायन हो रहा है। पलायन पर रोक लगाने के लिए वन अधिनियम में संशोधन किया जाना आवश्यक है।
समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह नेगी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को प्रेषित ज्ञापन में कहा कि समूचा उत्तराखण्ड वनाच्छादित है। उत्तराखण्ड वासियों ने हमेशा ही वनों को आराध्य मानकर इसकी सुरक्षा की है तथा वन और ग्रामीण एक-दूसरे के पूरक है। लेकिन वातानुकूलित आलिशान बंगलों में बैठे नीति नियताओं ने जमीनी हकीकत से बेखबर रहकर वन अधिनियम को कड़ा करके ग्रामीण के हक हकूक और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं छीनकर उत्तराखण्ड के लोग को यातनाओं के गर्त में धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि बाघ और गुलदार आए दिन लोगों को निवाला बनाने से लोग दहशत में है, वहीं जंगली जानवर खेती को चौपट कर रहे है, जिससे परेशान होकर ग्रामीण पलायन करने को मजबूर है। कहा कि बस्तियों के समीप जीर्ण क्षीर्ण विशालकाय पेड़ जान माल का खतरा बन चुके है, लेकिन सूचना देने के बाद भी विभाग चैन की नींद सो रहा है।

जीर्ण क्षीर्ण पेड़ों से बना जान माल का खतरा
कोटद्वार : नगर निगम क्षेत्र के अन्तर्गत सुमन मार्ग पर जीर्ण क्षीर्ण पेड़ों से जान माल का खतरा बना हुआ है। श्रीमती इंदू देवी ने कहा कि 22 सितंबर 2023 को रात में एक पेड़ अचानक उनके मकान पर गिर गया। जिससे उनका मकान क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत रही कि उस समय कोई घर के बार नहीं था। उन्होंने कहा कि उनके घर के पास जीर्ण क्षीर्ण हो चुके अन्य पेड़ कभी भी गिर सकते है, जिससे जानमाल का नुकसान हो सकता है। कहा कि पूर्व में वन विभाग को पेड़ कटवाने की अनुमति देने के लिए प्रार्थना पत्र दे चुके है, लेकिन अभी तक कोई भी कार्यवाही नहीं हो पाई है। उन्होेंने पेड़ से गिरने से होने वाली क्षतिपूर्ति का मुआवजा दिलाने और जीर्ण क्षीर्ण हो चुके पेड़ों को कटवाने की मांग की है।

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