चमोली। लगातार हो रहे भूस्खलन से स्थानीय लोगों की सुरक्षा के साथ ही चारधाम यात्रा पर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है।ग्रामीणों का कहना है कि यमुना और कुपड़ा खड्ड के चैनलाइजेशन का कार्य पिछले एक वर्ष से चल रहा है, लेकिन इसकी गति और प्रभाव संतोषजनक नहीं है।
यमुनोत्री धाम यात्रा का प्रमुख पड़ाव स्यानाचट्टी प्राकृतिक आपदाओं के दोहरे संकट से जूझ रहा है। एक ओर उफनती यमुना नदी लगातार कटाव कर रही है, वहीं दूसरी ओर पहाड़ों से हो रहे भूस्खलन ने खतरा बढ़ा दिया है। जून 2025 से लगातार आपदाओं की मार झेल रहा यह कस्बा अब अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है, जबकि स्थायी सुरक्षा उपाय अब भी अधूरे कार्यों और कागजों तक सीमित हैं।
पिछले वर्ष कुपड़ा खड्ड से आए भारी मलबे और बोल्डरों ने यमुना का प्रवाह रोककर अस्थायी झील जैसी स्थिति पैदा कर दी थी, जिससे क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ था। वर्तमान में डडोटी खड्ड से लगातार आ रहा मलबा यमुना नदी के तल को ऊंचा कर रहा है। इससे नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है और होटल व अन्य भवन खतरे की जद में आ गए हैं।