क्रिसमस व 31 दिसंबर को नैनीताल में नहीं रहेगा नाइट कफ्र्यू, शासन ने हाईकोर्ट में दिया शपथपत्र

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नैनीताल । नैनीताल में क्रिसमस व 31 की रात्रि आठ बजे से नाइट कफ्र्यू के जिला निगरानी कमेटी के सुझाव पर सरकार ने कहा कि यह संभव नहीं है। कोविड संक्रमण रोकने को जिला प्रशासन की ओर से पर्यटकों की कोविड जांच को अनिवार्य किया जा रहा है। साथ ही शारीरिक दूरी के अनुपालन, मास्क की अनिवार्यता, सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ नहीं होने देने के लिए अतिरिक्त पुलिस फोर्स की तैनाती की जाएगी। बुधवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि मलिमठ व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली व सच्चिदानंद डबराल की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने शपथ पत्र पेश कर कहा है कि हरिद्वार महाकुंभ में सामाजिक दूरी समेत कोविड गाइडलाइन के अनुपालन के लिए अगली सुनवाई से पहले नई एसओपी जारी कर दी जाएगी। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि नैनीताल, मसूरी व देहरादून में क्रिसमस व 31 दिसंबर को होने वाली पार्टियों को रोकने के लिए सरकार ने क्या इंतजाम किए हैं। इस पर सरकार की तरफ से कहा गया कि देहरादून व मसूरी में जिलाधिकारी द्वारा सभी होटलों, सार्वजनिक स्थानों, ढाबों में पार्टियां करने पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगा दी गई है। जो ऐसे आयोजन कराएगा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने जब नैनीताल के बारे में पूछा तो सरकार ने कहा कि इस पर जिलाधिकारी निर्णय लेंगे।
हालांकि जिला निगरानी कमेटी द्वारा कोर्ट को सुझाव दिया गया कि क्रिसमस व 31 दिसंबर को नैनीताल में शाम आठ बजे से लेकर सुबह 10 बजे तक रात्रि कफ्र्यू लगाया जाय। जिस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि कमेटी द्वारा दिये गए सुझाव पर अमल किया जाय। सरकार की ओर से सीएससी चंद्रशेखर रावत ने स्पष्ट किया कि रात्रि कफ्र्यू संभव नहीं है। सरकार की ओर से कोविड संक्रमण रोकने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
प्रवासियों को सुविधाओं के मामले में सरकार द्वारा कोर्ट को बताया गया कि केंद्र सरकर की 65 कल्याणकारी स्कीम राज्य में लागू की गई है। जिस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि इन योजनाओं में अनियमितताएं बरती गई है, इस पर सुनवाई बाद में सुनवाई की जाय। कोर्ट ने सभी बिंदुओं पर सुनवाई करते हुए राच्य सरकार को निर्देश दिए है अगली सुनवाई से पहले कोर्ट में एक नया शपथपत्र पेश करें।
जिला मनिटरिंग कमेटी हरिद्वार ने कोर्ट को अवगत कराया कि कुंभ को लेकर निर्माणाधीन पुल व फ्लाईओवर निर्माण की गति देखकर नहीं लगता कि यह कुंभ मेले से पहले बनकर तैयार हो जाएंगे। इस पर राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि ये कार्य नेशनल हाईवे करा रही है, उनसे इसका कोई मतलब नहीं है।
सरकार की ओर से कुंभ के स्थाई निर्माण कार्य 31 दिसंबर तक पूरा होने का शपथपत्र दिया गया है। साथ ही कहा है कि कोविड को देखते हुए अतिरिक्त अस्पताल बनाए जाएंगे। जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी।

गलत तरीके से प्रवेश देने पर गुरु रामराय कालेज पर पांच लाख जुर्माना, जुर्माने की रकम गढ़वाल विवि को मिलेगी
नैनीताल । हाई कोर्ट ने गुरु रामराय इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज कालेज आफ नर्सिंग देहरादून में नर्सिंग की 30 सीटों पर गलत तरीके से प्रवेश पर सख्त रवैया अपनाया है। कोर्ट ने नर्सिंग में प्रवेश ले चुके छात्रों का कोर्स पूरा करवाने के निर्देश देने के साथ ही अवैध एडमिशन पर इंस्टीट्यूट पर पांच लाख जुर्माना लगा दिया। जुर्माने की यह रकम गढ़वाल विवि को मिलेगी।
गुरुराम राय इंस्टीट्यूट में इंडियन नर्सिंग काउंसिल से 60 सीटों की अनुमति है। यह इंस्टीट्यूट गढ़वाल विवि से संबद्घ है। 2017-18 में इंस्टीट्यूट ने सौ सीटों की अनुमति के एवज में 130 सीटों पर प्रवेश दे दिए। इसकी अनुमति गढ़वाल विवि से नहीं ली गई। 2020 में मेडिकल कलेज की ओर से गढ़वाल विवि में मान्यता नवीनीकरण के लिए आवेदन किया तो विवि ने मान्यता देने से इन्कार कर दिया। विवि के इस आदेश को गुरुराम राय कलेज द्वारा याचिका दायर कर हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। इंस्टीट्यूट का कहना था कि इंडियन नर्सिंग काउंसिल से अनुमति के बाद ही एडमिशन दिए गए थे। जिस पर विवि के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने कहा कि नर्सिंग इंस्टीट्यूट से विवि का कोई करार नहीं है। यदि इंस्टीट्यूट को अतिरिक्त सीट पर प्रवेश देने थे तो विवि को पहले आवेदन किया जाना चाहिए था।

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