कांग्रेस ने किया ऑनलाइन खाद्यान्न वितरण का विरोध 

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। कांग्रेस पार्टी द्वारा सरकार के खाद्यन्न वितरण प्रणाली को ऑनलाईन खाद्यान्न वितरण करने के निर्णय का विरोध करते हुए उत्तराखंड में खाद्यान्न वितरण पुरानी प्रणाली के माध्यम से ही कराने की मांग की है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में तो कई राशन डीलरों के पास ऑनलाईन सुविधा नहीं है तथा कई राशन डीलरों को लैपटॉप संचालन की जानकारी नही है, जिस कारण राशन वितरण नहीं हो पा रहा है। इससे प्रतीत होता है कि राज्य सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के प्रति गम्भीर नहीं है। जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
पूर्व राज्यमंत्री जसवीर राणा के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन प्रेषित किया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में उपभोक्ताओं को खाद्यान्न वितरण ऑनलाईन कर दिया गया है, जिस कारण पर्वतीय क्षेत्रों में ही नहीं अपितु मैदानी क्षेत्रों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इंटरनेट की उपलब्धता न होने के कारण कई उपभोक्ता खाद्यान्न प्राप्त करने से वंचित रह जा रहे है। उन्होंने कहा कि पूरी तैयारी न होने के कारण ऑनलाईन खाद्यान्न वितरण में काफी परेशानियां उत्पन्न हो रही है। उन्होंने राज्यपाल से जनहित में उत्तराखंड सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से ऑनलाईन राशन वितरण की व्यवस्था समाप्त कर पुरानी व्यवस्था लागू करवाने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में पूर्व राज्यमंत्री जसवीर राणा, पूर्व प्रधान बृजेंद्र नेगी, आशुतोष कण्डवाल, सुनील खत्री, विक्रम रावत, अतुल नेगी, कुलदीप रावत, सत्यपाल पटवाल आदि शामिल थे।
सस्ते गल्ले की दुकान से फिंगर प्रिंट सिस्टम हटाने की मांग की
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। सरकार के डिजिटल तंत्र को देश में क्रांति की तरह देखा जा रहा है, लेकिन इसी डिजिटल तंत्र में खामियों की वजह लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। सरकारी राशन की दुकान में फिंगर प्रिंट न मिलने से लोगों को राशन नहीं मिल पा रहा है। नगर निगम कोटद्वार के पार्षदों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर तत्काल सस्ते गल्ले की दुकान से फिंगर प्रिंट सिस्टम हटाने की मांग की है।
पार्षद सूरज प्रसाद कांति ने कहा कि वर्तमान में कोरोना महामारी के कारण लोगों का रोजगार छिन गया है। अब तो जो जमा पूंजी थी उससे लोगों ने अपने परिवार का भरण पोषण किया। ऐसे में लोगों  को सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से मिलने वाले राशन से ही कुछ उम्मीद जगी थी, लेकिन उत्तराखण्ड सरकार ने सस्ते गल्ले की दुकान में फिंगर प्रिंट सिस्टम लागू कर दिया है। सरकार के इस तुगलकी फरमान से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राशन की दुकान में अधिकांश लोगों के फिंगर प्रिंट मैच नहीं कर रहे है, जिस कारण उन्हें राशन नहीं मिल पा रहा है। पार्षद ने बताया कि दुकानदारों का कहना है कि बायोमीट्रिक मशीन में कार्ड धारक का फिंगर प्रिंट अनिवार्य है। जब तक उसमें फिंगर प्रिंट मैच नहीं करेगी, तब तक राशन नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जनहित में सरकार को तत्काल इस तुगलकी फरमान को वापस लेना चाहिए। ज्ञापन देने वालों में पार्षद सूरज प्रसाद कांति, कुलदीप सिंह काम्बोज, अनिल नेगी, अनिल रावत, नईम अहमद आदि शामिल थे।
प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए नगर निगम कोटद्वार के पार्षद। 

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