रिखणीखाल प्रधान संगठन ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, मानदेय बढ़ाने समेत कई मांगें उठाईं
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को गति देने के लिए रिखणीखाल ब्लाक के ग्राम प्रधान संगठन ने विधायक और सांसद निधि की तर्ज पर प्रधान निधि की व्यवस्था करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में आकस्मिक आपदा और आगजनी जैसी घटनाओं के दौरान तत्काल राहत कार्य कराने के लिए ग्राम प्रधानों के पास पर्याप्त संसाधन होने चाहिए।

प्रधान संगठन की अध्यक्ष अरुणा रानी रावत के नेतृत्व में प्रधानों ने खंड विकास अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में कहा गया कि जिस प्रकार विधायक और सांसदों को विकास कार्यों के लिए निधि उपलब्ध कराई जाती है, उसी तर्ज पर ग्राम प्रधानों के लिए भी निधि की व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे ग्राम पंचायत स्तर पर जरूरत के अनुसार विकास और राहत कार्य तत्काल कराए जा सकेंगे। प्रधान संगठन ने ग्राम प्रधानों को न्यूनतम 20 हजार रुपये मासिक मानदेय दिए जाने की मांग की। इसके अलावा वीबीजी रामजी योजना में श्रमिकों की उपस्थिति आफलाइन दर्ज करने, ग्राम पंचायतों को मिलने वाली राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त की धनराशि जनसंख्या एवं भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर बढ़ाने की मांग की गई। ज्ञापन में जिला योजना के तहत स्वीकृत होने वाले विकास कार्यों के प्रस्ताव ग्राम पंचायतों की खुली बैठक में अनिवार्य रूप से पारित कराने, पंचायती राज एक्ट में शामिल सभी 29 विभागों को ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने की मांग भी उठाई गई। प्रधानों ने कहा कि ग्राम पंचायतों में विभिन्न विभागों के माध्यम से स्वीकृत 10 लाख रुपये तक के कार्यों के लिए ग्राम पंचायत को ही कार्यदायी संस्था बनाया जाना चाहिए। साथ ही पंचायतों को टैक्स के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने की अनुमति देने की मांग भी की गई। प्रधान संगठन ने कहा कि इन मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार करे, ताकि ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार और संसाधन मिल सकें और पहाड़ी क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति दी जा सके।