धर्मावाला के निजी अस्पताल में 22 वर्षीय युवती की मौत

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विकासनगर, देहरादून। विकासनगर क्षेत्र के धर्मावाला स्थित स्वामी विवेकानंद हॉस्पिटल में 22 वर्षीय युवती तनीषा चौहान की उपचार के दौरान मौत होने से परिवार में मातम पसरा है। युवती के परिजनों ने अस्पताल के चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। घटना के बाद क्षेत्र में भी शोक और आक्रोश का माहौल है। प्राप्त शिकायत के अनुसार, तनीषा चौहान पुत्री चमन सिंह चौहान, हाल निवासी मेहूंवाला खालसा, पोस्ट ऑफिस अंबाड़ी, जिला देहरादून एवं (मूल निवासी ग्राम शिबऊ तहसील चकराता) को 12 अक्टूबर 2026 को पैर में दर्द और संक्रमण की शिकायत के बाद उपचार के लिए स्वामी विवेकानंद हॉस्पिटल, धर्मावाला में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि चिकित्सकों ने जांच के बाद पैर में पस बनने की बात कही थी और ऑपरेशन कराने की जानकारी दी थी।
ऑपरेशन से पहले इंजेक्शन देने के बाद बिगड़ी तबीयत
परिजनों की शिकायत के मुताबिक, 13 अक्टूबर को तनीषा को ऑपरेशन के लिए ले जाया गया। उनका आरोप है कि ऑपरेशन से पहले शरीर को सुन्न करने के लिए इंजेक्शन दिए जाने के बाद युवती की तबीयत अचानक बिगड़ गई और कुछ ही समय में उसकी मौत हो गई।
इस घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजनों ने उपचार के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही की आशंका जताते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारण और उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही हुई या नहीं, इसकी पुष्टि जांच तथा संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद ही हो सकेगी।
परिजनों का आरोप-जवाब मांगने पर नहीं मिला संतोषजनक उत्तर
मृतका के परिजनों ने अपनी लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि घटना के बाद जब उन्होंने चिकित्सकों से युवती की मौत का कारण पूछा, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित डॉक्टर मौके से चले गए। परिजनों ने पुलिस से मामले की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
परिवार की मांग है कि अस्पताल में भर्ती किए जाने से लेकर ऑपरेशन की तैयारी, इंजेक्शन दिए जाने, अचानक तबीयत बिगड़ने और मौत होने तक की पूरी घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जाए। साथ ही, यदि जांच में किसी चिकित्सक या अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
22 साल की उम्र में बुझ गया घर का चिराग
तनीषा की असमय मौत से परिजन गहरे सदमे में हैं। जिस उम्र में युवाओं के सामने जीवन के नए सपने और संभावनाएं होती हैं, उस उम्र में परिवार की बेटी का दुनिया से चले जाना अपूरणीय क्षति है। घटना ने परिवार को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर चिंता जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि अस्पतालों में उपचार के दौरान मरीजों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना जरूरी है। किसी भी मरीज की स्थिति बिगड़ने पर परिजनों को समय पर सही जानकारी मिलनी चाहिए और शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए।
निष्पक्ष जांच से सामने आए सच्चाई
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि तनीषा की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन किया गया था। इसका उत्तर मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार में शामिल चिकित्सकों के बयान, आवश्यक विशेषज्ञ राय और संबंधित जांच से ही सामने आ सकेगा।
परिजनों ने प्रशासन और पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं और अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले में क्या पक्ष रखा जाता है।

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