तमिलनाडु में डीएमके – एआईडीएमके गठबंधन से बनाएंगे सरकार!, विजय की चेतावनी-सभी टीवीके एमएलए दे सकते हैं इस्तीफा

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चेन्नई , तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति को बेहद रोचक बना दिया है। किसी भी दल या चुनाव पूर्व गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (ञ्जङ्क्य) अपने पहले ही चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से अभी दूर है।
टीवीके प्रमुख विजय ने पहले ही डीएमके और एआईएडीएमके से समर्थन लेने से इनकार कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, वह कई बार राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर चुके हैं, लेकिन पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण उन्हें अब तक सरकार गठन का निमंत्रण नहीं मिला है।
इधर, टीवीके को न्योता न मिलने के बाद राज्य की सियासत और गर्मा गई है। खबरें हैं कि एमके स्टालिन की डीएमके और एआईएडीएमके के बीच संभावित समझौते की कोशिशें चल रही हैं। माना जा रहा है कि दोनों दलों को साथ लाने में भाजपा अहम भूमिका निभा रही है। यदि दोनों के बीच सहमति बनती है तो नया गठबंधन सरकार बनाने का दावा पेश कर सकता है।
इस बीच, द्रमुक अध्यक्ष और निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को नव-निर्वाचित विधायकों से पार्टी नेतृत्व के फैसलों का पालन करने को कहा। उन्होंने विधायकों को 10 मई तक चेन्नई में ही रहने के निर्देश दिए। स्टालिन ने कहा,
मेरी इच्छा एक मजबूत और रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने की है। हालांकि पार्टी हित को ध्यान में रखते हुए कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे।
डीएमके और एआईएडीएमके के संभावित गठबंधन की चर्चाओं पर टीवीके ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी का कहना है कि यदि दोनों दल मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करते हैं तो टीवीके के सभी 108 विधायक इस्तीफा दे सकते हैं। पार्टी का तर्क है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल को विजय को सरकार गठन के लिए आमंत्रित करना चाहिए।
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है। टीवीके ने 108 सीटें जीती हैं। हालांकि कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों का समर्थन देने की पेशकश की है, फिर भी पार्टी बहुमत के आंकड़े से दूर है। विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता है, इसलिए उन्हें एक सीट छोड़नी होगी।
चुनाव परिणामों की बात करें तो एआईएडीएमके को 47 सीटें मिली हैं। उसके सहयोगी पीएमके ने 4 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा और एएमएमके को एक-एक सीट मिली है। डीएमके को 59 सीटें हासिल हुईं, जबकि कांग्रेस को 5 सीटों से संतोष करना पड़ा। गठबंधन के अन्य सहयोगियों-आईयूएमएल, भाकपा, माकपा और वीसीके-को 2-2 सीटें मिलीं, जबकि डीएमडीके ने 1 सीट जीती।

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