ट्रेजरी से वेतन, पेंशन भुगतान में अड़चन डालने वालों के खिलाफ कर्मचारी लामबंद

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देहरादून। जल संस्थान और जल निगम के कर्मचारियों, पेंशनर्स को ट्रेजरी से वेतन, पेंशन का भुगतान सुनिश्चित कराने की सरकार की मुहिम के खिलाफ विभाग ही खड़ा हो गया है। जल संस्थान मैनेजमेंट की ओर से इस नई व्यवस्था पर आपत्ति जताने से कर्मचारी संगठन भड़क गए हैं। एक सिरे से सभी कर्मचारी संगठनों ने मैनेजमेंट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
जल निगम जल संस्थान संयुक्त मोर्चा ने जल संस्थान मैनेजमेंट के रवैये को सीधे तौर पर कर्मचारी विरोधी करार दिया। संयोजक रमेश बिंजौला और विजय खाली ने इसे सीधे तौर पर वादाखिलाफी करार दिया। सरकार की व्यवस्था को चुनौती देने वाला कदम बताया। कहा कि एक ओर जल संस्थान मैनेजमेंट वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए कर्मचारियों को राशीकरण की सुविधा का लाभ नहीं दे रहा है। इसके साथ ही कर्मचारियों को तमाम वित्तीय लाभ नहीं मिल पा रहे हैं। जब सरकार ट्रेजरी के माध्यम से, ये सभी लाभ कर्मचारियों को सुनिश्चित कराने को तैयार है, तो निजी स्वार्थों के चलते आनाकानी की जा रही है। कहा कि ट्रेजरी व्यवस्था से कर्मचारी, सरकार का ही नहीं, बल्कि जल संस्थान मैनेजमेंट का भी बड़ा लाभ है। अभी मौजूदा समय में 331 करोड़ के पेयजल बिलों से होने वाली वसूली में 300 करोड़ वेतन, पेंशन के भुगतान में ही खर्च हो रहे हैं। मेंटनेंस, सेंटर स्टोर खरीद के लिए विभाग शासन पर ही निर्भर है। ऐसे में जब ट्रेजरी के जरिए पूरी व्यवस्था जब सरकार के हाथ में आ जाएगी, तो विभाग का आधे से अधिक राजकीयकरण तो अपने आप हो जाएगा। ट्रेजरी से वेतन, पेंशन भुगतान पेयजल के राजकीयकरण की दिशा में अहम है। मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि ट्रेजरी व्यवस्था लागू न हुई, तो चुनाव आचार संहिता समाप्त होते ही आंदोलन शुरू हो जाएगा।
आंदोलन से दूर रहे संगठन भी समर्थन में आए
पेयजल के राजकीयकरण को लेकर पिछले दिनों आचार संहिता लगने से पहले चलाए गए आंदोलन से दूर रहने वाले कर्मचारी संगठन भी ट्रेजरी व्यवस्था के पक्ष में लामबंद हो गए हैं। जल संस्थान कर्मचारी संघ के महामंत्री नंदलाल जोशी ने कहा कि राजकीयकरण होने तक ट्रेजरी व्यवस्था को तत्काल लागू किया जाए। संघ ट्रेजरी व्यवस्था के पक्ष में खड़ा है। पेयजल तकीनीकी फील्ड कर्मचारी संगठन के महामंत्री रामपाल कंडारी ने कहा कि ट्रेजरी व्यवस्था का यदि मैनेजमेंट की ओर से विरोध किया गया, तो इसके खिलाफ आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटा जाएगा। हर हाल में इसे लागू कराया जाएगा।

 

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