उत्तरकाशी, उत्तरकाशी जनपद के सीमांत विकासखंड पुरोला, नौगांव और मोरी में हाल ही में आई अतिवृष्टि, भूस्खलन और बाढ़ से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। नगदी फसलों के साथ-साथ धान की फसल भी बर्बाद होने से क्षेत्र के किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं। इस बीच प्रभावित क्षेत्र के किसानों एवं कृषक संगठनों ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव, उत्तराखंड सरकार को ज्ञापन भेजकर तत्काल राहत, मुआवजा और किसान पहचान संख्या की अनिवार्यता में अस्थायी राहत देने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि पर्वतीय क्षेत्रों के अधिकांश किसान कृषि और बागवानी पर निर्भर हैं। हाल की प्राकृतिक आपदा के कारण खेतों में भारी मात्रा में मलबा भर गया, जिससे टमाटर, शिमला मिर्च, नाशपाती जैसी नगदी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं। इसके अलावा क्षेत्र की प्रमुख खाद्य फसल धान भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि उनकी पूरे वर्ष की मेहनत और निवेश कुछ ही घंटों में बर्बाद हो गया। किसानों ने ज्ञापन में बताया कि वर्तमान में सरकारी राहत और मुआवजा प्राप्त करने के लिएां१ेी१ कऊ अनिवार्य है, लेकिन पुरोला, नौगांव और मोरी जैसे दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में इंटरनेट और सर्वर की समस्या पहले से बनी रहती है।
आपदा के बाद संचार व्यवस्था प्रभावित होने से किसान अपनीां१ेी१ कऊ अपडेट या पंजीकृत नहीं करा पा रहे हैं। ऐसे में अनेक पात्र किसान राहत योजनाओं से वंचित होने की आशंका जता रहे हैं।