बागेश्वर। टीईटी पात्रता परीक्षा अनिवार्यता पर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ बागेश्वर जिला इकाई ने कड़ी आपत्ति जताई है। कहा कि उम्रदराज शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखने का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपकर उन्हें समस्या का समाधान करने की मांग की है। साथ ही अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन भी किया। सोमवार को नुमाइशखेत मैदान में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि उम्रदराज शिक्षकों को टीईटी परीक्षा को अनिवार्य किया जा रहा है। दो साल के भीतर परीक्षा पास नहीं करने पर बाहर कार रास्ता दिखाने की भी बात की जा रही है। इससे प्रदेश में करीब 30 हजार शिक्षक प्रभावित होंगे। ऐसे में शिक्षक और परिजन तनाव में हैं। परेशान सभी शिक्षक कलक्ट्रेट पहुंचे। डीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में कहा कि सेवारत शिक्षकों के लिए चार वर्षों से अनिवार्य रूप से टीईटी पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने का संसोधन कर दिशा निर्देश जारी किए गए हैं, जबकि उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभ्ज्ञाग ने आठ साल बीत जाने के बाद भी इसपर कोई निर्देश जारी नहीं किए हैं। यदि सयम रहते विभाग ने निर्देश जारी किए होते तो अधिकतर शिक्षक टीईटी पात्रता परीक्षा पास कर चुके होते। अपनी शैक्षिक योग्यता में भी वृद्धि कर चुके होते। शिक्षकों के प्रति विभाग की यह घोर लापरवाही है। उन्होंने कहा कि हजारों उम्र दराज शिक्षक और उनके परिजन नौकरी जाने के खतरे से तनावग्रस्त हैं। इसे देखते हुए शिक्षकों को टीईटीटी पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से मुक्त रखने की मांग की है। इस मौके पर जिला महामंत्री भुवन चंद्र भट्ट, महेश चंद्र जोशी संरक्षक, अध्यक्ष रमेश सिंह, दमयंती, तारा सिंह सोरागी समेत बागेश्वर, गरुड़ व कपकोट ब्लॉक संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।