कुलपति प्रोफेसर प्रकाश सिंह ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
जयन्त प्रतिनिधि।
श्रीनगर गढ़वाल : ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ संकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से भारत सरकार की महत्त्वाकांक्षी पहल ‘युवा संगम’ (फेज-7) के तहत हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के एकेडमिक एक्टिविटी सेंटर में एक विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के समापन पर उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों एवं शैक्षणिक संस्थानों से आए चयनित डेलीगेट्स के दल को विश्वविद्यालय परिसर से बसों के माध्यम से पश्चिम बंगाल के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

इस अवसर पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रकाश सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज का दिन हम सभी के लिए गौरव और उत्साह का दिन है। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करता हुआ यह ‘युवा संगम’ कार्यक्रम केवल एक अंतरराज्यीय यात्रा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता, बंधुत्व और राष्ट्रीय अखंडता को एक सूत्र में पिरोने वाला अद्भुत महायज्ञ है। उन्होंने कहा कि हम सभी के लिए यह अत्यंत ही गौरव का विषय है कि भारत सरकार द्वारा पुन: हमारे विश्वविद्यालय को उत्तराखंड राज्य के लिए इस कार्यक्रम की नोडल एजेंसी के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह अवसर निश्चित रूप से हमारे विश्वविद्यालय की कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इस यात्रा में उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों से प्रतिनिधियों का चयन किया गया है। इसके साथ ही राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों से छात्र-छात्राओं का चयन हुआ है, जो इस सांस्कृतिक और बौद्धिक आदान-प्रदान के माध्यम से पूरे उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व पश्चिम बंगाल में करेंगे। कार्यक्रम में नोडल अधिकारी एवं पृथ्वी विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. महाबीर सिंह नेगी ने बताया कि यह यात्रा 5 ‘पी’ -पर्यटन, परंपरा, प्रगति, प्रौद्योगिकी और परस्पर संपर्क के मूल सिद्धांतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। डीन नियुक्ति प्रोफेसर मोहन सिंह पंवार ने पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए विद्यार्थियों से अपील की कि यात्रा के दौरान स्वच्छता के मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए और कहीं भी गंदगी न फैलाई जाए। कार्यक्रम का सफल संचालन ‘युवा संगम’ के समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) डॉ. नरेश ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव प्रोफेसर वाई.पी. रैवानी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ओ.पी. गोसाईं, निदेशक प्रो. हरिभजन सिंह चौहान, सहायक नोडल अधिकारी डॉ. कौशल, टीम के सदस्य डॉ. अनुराही, डॉ. नरेंद्र, डॉ. सना रफी सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।