दिल्ली जिमखाना क्लब को सरकार का आश्वासन, हाई कोर्ट में कहा- जबरन खाली नहीं कराएंगे

Spread the love

नईदिल्ली, दिल्ली जिमखाना क्लब से जुड़े मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि वो जबरन क्लब खाली नहीं कराएगी। सरकार ने आश्वासन दिया कि क्लब के खिलाफ कोई भी बेदखली की कार्यवाही कानूनन और उचित नोटिस के बाद ही की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि अगर क्लब 5 जून तक जमीन खाली नहीं करता है तो उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा, हम कानून के अनुसार ही कब्जा लेंगे। हमने उन्हें 5 जून तक स्वेच्छा से जगह खाली करने का विकल्प दिया है। मान लीजिए कि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो ऐसा नहीं है कि पुलिस तुरंत आकर जबरन कब्जा कर लेगी। सार्वजनिक परिसरों को खाली कराने के संबंध में कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अलावा हम कब्जा नहीं लेंगे।
क्लब सदस्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने हाई कोर्ट से यथास्थिति बनाए रखने या सरकार के इस आश्वासन को दर्ज करने का आग्रह किया कि कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने तर्क दिया कि अधिग्रहण आदेश अस्पष्ट और विरोधाभासी था, जिसमें संस्थागत जरूरतों, रक्षा और सार्वजनिक अवसंरचना के अस्पष्ट संदर्भों का हवाला दिया गया था। उन्होंने कहा, एक क्लब जो 100 साल से चल रहा है, वह जुलाई तक इंतजार कर सकता है।
कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह पता चले कि सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत कार्यवाही शुरू की गई है। जस्टिस अवनीश झिंगन ने केंद्र को समन जारी कर क्लब के सदस्यों और क्लब स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर मुकदमों पर 8 सप्ताह के भीतर लिखित जवाब मांगा है। हालांकि, सिघंवी की अपील के बावजूद कोर्ट ने कोई भी अंतरिम आदेश जारी करने से मना कर दिया। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
दरअसल, सरकार ने 27 एकड़ जमीन पर फैले दिल्ली जिमखाना क्लब को जगह छोड़ने को कहा है। 22 मई को आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन भूमि और विकास कार्यालय ने नोटिस जारी कर क्लब को 5 जून तक संपत्ति सौंपने का निर्देश दिया है। सरकार ने तर्क दिया कि प्रधानमंत्री आवास और दूसरे सुरक्षा प्रतिष्ठानों के नजदीक की यह जमीन रक्षा अवसंरचना, शासन संबंधी सुविधाओं और अन्य सार्वजनिक सुरक्षा आवश्यकताओं को मजबूत करने के लिए जरूरी है।
कुल 129 करोड़ रुपये की संपत्ति वाले दिल्ली जिमखाना क्लब 1913 में ब्रिटिश काल में शुरू हुआ था, तब इसका नाम इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब था। यह पहले सिर्फ गोरे अंग्रेज और उच्च श्रेणी के लोगों के लिए था। आजादी के पास इसे दिल्ली जिमखाना क्लब कर दिया गया, लेकिन इसकी अमीरों वाली विरासत बरकरार रही। यहां सदस्यता के लिए संपर्क निर्भर करता है न कि सिर्फ पैसा। यहां टेनिस कोर्ट, स्विमिंग पूल, बिलियर्ड्स, कॉटेज आदि सुविधाएं हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *