जयन्त प्रतिनिधि।
लैंसडौन : कालेश्वर मंदिर, गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर का एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल है। मंदिर में गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर के जवानों द्वारा प्रत्येक रविवार को नियमित रूप से पूजा-अर्चना एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से जवानों में आध्यात्मिक चेतना, मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा एवं आपसी सौहार्द की भावना को बढ़ावा मिलता है।

मान्यता के अनुसार, ‘कालुंडांडा’ शब्द ‘कालू’ अर्थात काला और ‘डांडा’ अर्थात पर्वत श्रृंखला से मिलकर बना है। यह क्षेत्र मुख्यत: बांज एवं बुरांश के घने वनों से आच्छादित था, जो दूर से देखने पर विशेषकर धुंधले एवं कोहरे वाले मौसम में गहरे अथवा काले रंग का दिखाई देता था। इसी कारण इस स्थान का नाम ‘कालुंडांडा’ पड़ा माना जाता है। वर्ष 1887 नवम्बर माह में गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट के इस क्षेत्र में आगमन के पश्चात् रेजिमेंट की धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं को बनाये रखने के उद्देश्य से वर्ष 1901 में इस मंदिर का निर्माण कराया गया। जो आज श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसी पावन परम्परा का निर्वहन करते हुए श्रावण मास के अंतिम सोमवार को गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर, लैंसडाउन के कमांडेंट ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी, विशिष्ट सेवा मेडल के निर्देशन में श्री कालेश्वर महादेव मंदिर परिसर में भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान भारी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर द्वारा श्रावण मास के पावन अवसर पर प्रतिवर्ष इस धार्मिक आयोजन की परंपरा को पूर्ण श्रद्धा एवं उत्साह के साथ निभाया जाता है। इस अवसर पर परिवार कल्याण संगठन (जीआरआरसी) की अध्यक्षा रेखा नेगी, सैन्य अधिकारी, सैनिक एवं उनके परिजनों सहित स्थानीय लोगों ने उत्साह पूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के समापन पर कमांडेंट ने कहा कि गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर द्वारा आयोजित यह धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के साथ-साथ समाज में सेवा, सद् भाव आस्था और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का कार्य करता है। कहा कि सेना और स्थानीय नागरिकों के बीच ऐसी सक्रिय सहभागिता से सामजिक एकता एवं पारस्परिक सहयोग की भावना और अधिक प्रबल होती है।