जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी : उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली जड़ी-बूटियों की खेती अब ग्रामीणों की आजीविका को मजबूत बनाएगी। जिले में भी किसान जड़ी-बूटी की खेती में रुचि ले रहे हैं। थलीसैंण ब्लॉक के सिरतोली, मरोड़ा, पडाल, दौला व मरखोला गांवों में ग्रामीण किसान एक-एक हेक्टयर में कुटकी व कूठ की खेती करेंगे। वैज्ञानिक डा. जयदेव चौहान ने बताया कि पूर्व में सिरतोली गांव में जड़ी-बूटी के कृषिकरण को लेकर सर्वेक्षण किया गया था। सर्वे के आधार पर सिरतोली की आबोहवा कुटकी और कूठ की खेती के लिए मुफीद पाई गई थी। जिसके बाद आसपास के अन्य गांवों के ग्रामीणों ने भी जड़ी-बूटी की खेती में दिलचस्पी दिखाई है। जो बहुत उत्साहित करने वाला है। बताया कि प्रत्येक गांव में एक-एक हेक्टेयर में जड़ी-बूटी की यह खेती ट्रायल के आधार पर की जाएगी। जिसका परिणाम आगामी एक साल के भीतर मिलेगा।
थलीसैंण ब्लॉक के सिरतोली, मरोड़ा, पडाल, दौला व मरखोला गांवों में ग्रामीण किसान ट्रायल के आधार पर एक-एक हेक्टयर में कुटकी व कूठ की खेती करेंगे। इसके लिए ग्रामीणों को कुटकी के 20 हजार और कूठ के 1500 पौध वितरित की गर्ई है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विवि के उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक) के निदेशक डा. विजयकांत पुरोहित के दिशा-निर्देशन में राठ महाविद्यालय पैठाणी में औषधीय पादपों के कृषिकरण पर कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। हैप्रेक के वैज्ञानिकों ने किसानों को कुटकी और कूठ जड़ी-बूटी के कृषिकरण, उत्पादन, संवद्र्धन संरक्षण और विपणन की जानकारी दी। साथ ही किसानों को जड़ी-बूटी की खेती का प्रशिक्षण दिया गया। इस मौके पर वैज्ञानिक डा. सुदीप सेमवाल ने कहा कि वर्तमान समय में गांवों में जंगली जानवरों के आंतक से ग्रामीण परेशान है, ऐसे में जड़ी-बूटी की खेती कृषकों के लिए वरदान साबित हो सकती है। कहा कि जड़ी-बूटी की खेती कर ग्रामीण स्वाभिलंबी बन सकते है। इस अवसर पर प्रगतिशील किसान विनोद सिंह राठी, आशाराम पंत, पवन बिष्ट, विजयलक्ष्मी, संजय, राधाकृष्ण गोदियाल के साथ ही हैप्रेक संस्थान के मुकेश करासी आदि मौजूद रहे।