पुरोला। आराकोट-बंगाण के 52 गांवों के सेब बागवानों की करीब दो दशक पुरानी फल मंडी की मांग अब साकार होने की उम्मीद जगी है। मंडी परिषद के सचिव अजय डबराल के क्षेत्र के स्थलीय निरीक्षण के बाद मंडी स्थापना की प्रक्रिया को नई गति मिलने के संकेत हैं।
आराकोट-बंगाण के मासमोर, पिंगल और गाड़-कोठी क्षेत्र के 52 गांव रवांई के प्रमुख सेब उत्पादक इलाकों में शामिल हैं। बागवान लंबे समय से आराकोट या टिकोची में फल मंडी स्थापित करने की मांग करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि मंडी बनने से सेब और अन्य बागवानी उत्पादों को बेचने के लिए दूरस्थ मंडियों पर निर्भरता खत्म होगी और परिवहन लागत व समय की बचत होगी।
इसी क्रम में मंडी परिषद के सचिव डबराल ने आराकोट पहुंचकर किसानों, बागवानों और ग्रामीणों के साथ बैठक की। सचिव ने आराकोट में वर्षों से अधूरे पड़े निर्माणाधीन कोल्ड स्टोर का भी जायजा लिया। ग्रामीणों ने कोल्ड स्टोर का निर्माण जल्द पूरा कराने के साथ फल मंडी की स्थापना की प्रक्रिया तेज करने की मांग रखी। बैठक में किसान एवं बागवान मनमोहन सिंह चौहान, प्रमोद रावत, हरीश चौहान, विनोद रावत मौजूद रहे।