भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता लागू, हजारों उत्पाद होंगे सस्ते

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-कपड़ा, जूते, चमड़ा, समुद्री उत्पाद और आभूषण के निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
-स्कॉच व्हिस्की और ब्रिटिश कारों पर भी घटेगा आयात शुल्क
नई दिल्ली, भारत और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के बीच हुआ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता बुधवार से आधिकारिक रूप से लागू हो गया। 26 जुलाई 2025 को लंदन में दोनों देशों के बीच इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसे व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) के नाम से जाना जाता है। यह किसी विकसित अर्थव्यवस्था के साथ भारत के सबसे बड़े व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है।
इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार में शामिल हजारों उत्पादों पर सीमा शुल्क समाप्त या कम किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, वहीं कई उत्पादों की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
समझौते के तहत ब्रिटेन को होने वाले भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात पर अब कोई सीमा शुल्क नहीं लगेगा। इसका सबसे अधिक लाभ कपड़ा, रेडीमेड वस्त्र, चमड़ा, जूते-चप्पल, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद, अभियांत्रिकी उत्पाद, रसायन तथा कृषि उत्पादों के निर्यातकों को मिलेगा। इससे भारतीय उत्पाद ब्रिटिश बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और निर्यात बढ़ने की संभावना है।
भारत ने समझौते के तहत ब्रिटेन से आयात होने वाली स्कॉच व्हिस्की और जिन पर लगने वाले आयात शुल्क को चरणबद्ध तरीके से कम करने पर सहमति दी है। वर्तमान में इन पर 150 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है, जिसे तत्काल घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। अगले दस वर्षों में इसे घटाकर 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा।
इसका लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा और कई प्रीमियम स्कॉच ब्रांडों की खुदरा कीमतों में लगभग 5 से 10 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है।
समझौते के तहत ब्रिटेन में निर्मित मोटर कारों पर लगने वाला आयात शुल्क भी चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। वर्तमान में इन वाहनों पर 110 प्रतिशत तक शुल्क लगता है, जिसे अगले 15 वर्षों में घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा।
हालांकि इसका लाभ तुरंत नहीं मिलेगा। शुरुआती वर्षों में रियायती शुल्क का लाभ केवल शुल्क दर कोटा प्रणाली के तहत सीमित संख्या में आयातित वाहनों को ही मिलेगा। पहले वर्ष में केवल 20 हजार पूर्ण रूप से निर्मित पेट्रोल और डीजल यात्री वाहनों पर यह रियायत लागू होगी।
इसका लाभ मुख्य रूप से एस्टन मार्टिन, बेंटले, जगुआर लैंड रोवर (ब्रिटेन में निर्मित मॉडल), मैकलारेन और रोल्स-रॉयस जैसी लग्जरी वाहन निर्माता कंपनियों को मिलेगा।
यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय पेशेवरों को भी राहत देगा। अब अल्पकालिक कार्य के लिए ब्रिटेन जाने वाले भारतीय तकनीकी और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों को दोहरा सामाजिक सुरक्षा अंशदान नहीं देना होगा।
ऐसे कर्मचारी पांच वर्षों तक केवल भारत में ही सामाजिक सुरक्षा अंशदान जमा करेंगे। इससे उनकी हाथ में मिलने वाली आय बढ़ेगी और भारतीय कंपनियों की लागत भी कम होगी।
भारत के कपड़ा, रेडीमेड वस्त्र और वस्त्र उद्योग से जुड़े व्यापारियों के लिए यह समझौता अत्यंत लाभकारी माना जा रहा है। अब ब्रिटेन जाने वाले 99 प्रतिशत भारतीय वस्त्रों पर शून्य सीमा शुल्क लगेगा। इससे भारतीय उत्पाद बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अधिक आकर्षक और सस्ते होंगे।
इसी प्रकार जूते-चप्पल और चमड़े के उत्पादों के निर्यात पर भी शुल्क समाप्त होने से आगरा, कानपुर और चेन्नई जैसे प्रमुख चमड़ा उद्योग केंद्रों के व्यापारियों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
समझौते के बाद पैक खाद्य पदार्थ, तैयार भोजन तथा समुद्री उत्पादों के भारतीय निर्यातकों के लिए भी ब्रिटेन का बाजार अधिक सुलभ हो जाएगा। इससे इन क्षेत्रों में निर्यात और रोजगार दोनों में वृद्धि की संभावना है।
वैश्विक व्यापार अनुसंधान पहल (जीटीआरआई) के अनुसार केवल सीमा शुल्क में कमी से सभी उद्योगों को समान लाभ नहीं मिलेगा। औषधि, रसायन, प्लास्टिक एवं रबर, बहुमूल्य धातु, लोहा एवं इस्पात, पेट्रोलियम उत्पाद, तंबाकू तथा मदिरा जैसे क्षेत्रों में तकनीकी मानकों, पर्यावरणीय नियमों, प्रमाणन प्रक्रियाओं और बाजार तक पहुंच जैसी चुनौतियां अब भी बनी रहेंगी। इसलिए इन क्षेत्रों को सीमित लाभ मिलने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रिटेन से आयात होने वाली ब्रांडेड चॉकलेट, इत्र, सौंदर्य प्रसाधन और परिधानों की कीमतों में तत्काल बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। इन उत्पादों पर शुल्क धीरे-धीरे कम होगा। इनके अंतिम खुदरा मूल्य पर माल ढुलाई खर्च, रुपये और पाउंड की विनिमय दर तथा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का भी प्रभाव रहेगा। इसलिए समय के साथ इनकी कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते के लागू होने से भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही निवेश, रोजगार और औद्योगिक सहयोग को भी नई गति मिलेगी, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होने की उम्मीद है।
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