एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल को भेजा ज्ञापन, किसानों के हित में कई मांगें उठाईं
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : अखिल भारतीय किसान सभा की जिला इकाई ने भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इससे देश में कृषि क्षेत्र का संकट और गहरा सकता है। सभा ने आशंका व्यक्त की कि समझौते का सबसे अधिक असर छोटे और मझौले किसानों पर पड़ेगा और उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। किसान सभा ने देशहित में अमेरिका के साथ किए जा रहे सभी प्रकार के व्यापार समझौतों को रद्द करने की मांग की है।

सोमवार को किसान सभा के जिला सचिव आशुतोष चंद्र के नेतृत्व में संगठन के सदस्य तहसील परिसर पहुंचे। यहां उन्होंने उपजिलाधिकारी संदीप कुमार के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में कहा गया कि वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर प्रक्रिया चल रही है। किसान सभा का कहना है कि यह समझौता देश के कृषि हितों के अनुकूल नहीं है। इससे कृषि उपज के बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के साथ ही किसानों की आय पर भी असर पड़ सकता है। किसान सभा ने सभी फसलों पर गारंटी के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी अधिकार देने की मांग की। इसके साथ ही किसान आत्महत्या के मामलों में मृतक किसानों के स्वजन और दिहाड़ी मजदूरी करने वाले श्रमिकों के परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग उठाई गई। ज्ञापन में मनरेगा को बहाल करने के साथ ही वर्षभर में कम से कम 200 दिन रोजगार उपलब्ध कराने और मजदूरी बढ़ाकर 700 रुपये प्रतिदिन किए जाने की मांग भी की गई। किसान सभा ने बिजली निजीकरण विधेयक-2025 और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम संशोधन विधेयक को वापस लेने की मांग की। इसके अलावा चार श्रमिक संहिताओं को रद्द करने, जबरन भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाने और उत्तराखंड के किसानों को जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई। किसान सभा ने प्रत्येक वृद्ध किसान को 10 हजार रुपये मासिक पेंशन देने की मांग भी उठाई। इस मौके पर वीरेंद्र सिंह, बचन सिंह, मदन सिंह, कमलजीत, गजेंद्र सिंह, विमला और रामेश्वरी देवी सहित किसान सभा के अन्य सदस्य मौजूद रहे।