कोटद्वार का नाम बदलने का विरोध शुरू, पुराना नाम ही रखने की मांग

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार।
गढ़वाल का प्रवेश द्वार कोटद्वार का नाम बदलने का विरोध शुरू हो गया है। उत्तराखण्ड विकास समिति ने कोटद्वार का नाम कण्वनगरी करने का विरोध किया। समिति ने सरकार से कोटद्वार का नाम यथावत रखने की मांग की।
समिति के अध्यक्ष जानकी बल्लभ मैंदोला ने उपजिलाधिकारी कोटद्वार के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को भेजे ज्ञापन में कहा कि प्रदेश सरकार ने राजनैतिक द्वेष से ऐतिहासिक नगर कोटद्वार की पहचान समाप्त करके भराड़ीसैंण में प्रस्ताव को मंजूरी देकर कोटद्वार का नाम बदलकर कण्वनगरी का दिया है। सरकार ने कोटद्वार को जिला बनाने की घोषणा तो नहीं की, लेकिन कोटद्वार का नाम बदलकर पहचान समाप्त कर दी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सैनानी शहीद चन्द्रशेखर आजाद, भवानी सिंह, बलदेव सिंह आर्य, छवाण सिंह नेगी, कृपाराम मिश्रा, मुुकुन्दी लाल बैरिस्टर, भैरवदत्त उमानन्द बड़थ्वाल, शत्रुघन प्रसाद बडोला, ललिता प्रसाद नैथानी आदि की कर्मस्थली कोटद्वार रही है। इन महान विभूतियों का सरकार सम्मान करके कोटद्वार का नाम बदलने वाले प्रस्ताव मंजूरी को निरस्त करें। उन्होंने कहा कि कोटद्वार का नाम यथावत रखा जाय अन्यथा समिति उग्र आंदोलन को बाध्य होगी। ज्ञापन देने वालों में विपुल उनियाल, जीके बड़थ्वाल, विजय माहेश्वरी, पूरण सिंह नेग, सावित्री रावत, दमयन्ती नेगी आदि शामिल थे।

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