बिग ब्रेकिंग: कोटद्वार में अतिक्रमण पर गरजी जेसीबी, मचा हड़कंप

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार नगर निगम ने राष्ट्रीय राजमार्ग से अतिक्रमण हटाने कार्यवाही शुरू कर दी है। बुधवार को बदरीनाथ मार्ग पर प्रशासन ने अतिक्रमण को ध्वस्त किया। प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने के लिए तीन जेसीबी मशीनें लगाई गई थी। प्रशासन की कार्यवाही से व्यापारियों में हड़कंप मच गया।  आनन-फानन में व्यापारियों ने प्रशासन के तेवर देखकर स्वंय ही अपने कब्जे हटाने शुरू कर दिये। हाईकोर्ट के आदेश के बाद से नगर निगम और प्रशासन पिछले तीन दिनों से अतिक्रमण हटाने की तैयारी कर रहा था। व्यापारियों को स्वयं अतिक्रमण हटाने को कहा गया था, लेकिन जब व्यापारियों ने अतिक्रमण नहीं हटाया तो बुधवार को एसडीएम तीन टीमों के साथ अतिक्रमण हटाने के लिए निकल पड़े। उपजिलाधिकारी ने बताया कि निगम द्वारा चिन्हित सभी अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई जारी रहेगी।
बुधवार को उपजिलाधिकारी योगेश सिंह मेहरा के नेतृत्व में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया।

एसडीएम तीन टीमों के साथ अतिक्रमण हटवाने पहुंचे। ट्रैक्टर-ट्रॉली और जेसीबी मशीन लेकर मालवीय उद्यान के पास से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही शुरू की गई। अतिक्रमण हटता देख व्यापारियों में हड़कंप मच गया और काफी लोगों ने खुद ही अपनी दुकानों के सामने किए गए अतिक्रमण को हटाना शुरू कर दिया। अभियान के दौरान दुकानों के सामने लगे टीन शेड हटवाए गए। साथ ही अतिक्रमण कर रहे होर्डिंग्स को भी हटाया गया। दुकानों के सामने रखा सामान हटवाया गया। दुकानों के सामने ठेला और फड़ लगाने वाले खुद अपना सामान भरने लगे। बुधवार को बदरीनाथ मार्ग से झंडाचौक तक अतिक्रमण हटाया गया। प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान लगातार चलाया जाएगा। अतिक्रमण किसी भी कीमत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बता दें विगत 18 नवंबर को एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि मलिमठ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने नगर निगम की नजूल भूमि और बदरीनाथ मार्ग से अवैध अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी किया था। अतिक्रमण को चिन्हित करने के लिए उपजिलाधिकारी योगेश मेहरा ने नगर निगम, प्रशासन व राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग की तीन संयुक्त टीमें गठित की गई थी। पहले चरण में टीम ने लालबत्ती से झंडाचौक, दूसरे चरण में मालवीय उद्यान से झंडाचौक और अंतिम चरण में मालवीय उद्यान से गिवईस्त्रोत पुल के मध्य अतिक्रमण चिन्हित करने के साथ ही लाल निशान लगाए थे। अभियान के दौरान टीम ने लालबत्ती चौराहे से मालवीय उद्यान तक करीब 137 अतिक्रमण चिह्नित किए। जबकि मालवीय उद्यान से गिवईस्रोत के मध्य करीब 35 अतिक्रमण चिन्हित किये गये थे।

चिन्हित अतिक्रमण हटाया जाएगा
कोटद्वार। नगर निगम कोटद्वार के नगर आयुक्त पीएल शाह का कहना है कि हाईकोर्ट का बदरीनाथ मार्ग में नगर निगम की नजूल भूमि के फुटपाथ पर जो अतिक्रमण है उसे हटाने का आदेश है। बरामदे और फुटपाथ पर जहां भी अतिक्रमण होगा उसे हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग होने के कारण सुबह के समय ही अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा रहा है। क्योंकि इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही हर समय बनी रहती है। यह अभियान लगातार चलता रहेगा। नगर आयुक्त ने बताया कि लोगों और व्यापारियों द्वारा विरोध किया जा रहा है। व्यापारियों से वार्ता की गई है। कुछ व्यापारियों ने अतिक्रमण हटाने के लिए 10 से 15 दिन का समय मांगा है। लेकिन निगम की ओर से आपत्तियों पर सुनवाई के दौरान 17 दिन का समय अतिक्रमण हटाने के लिए दिया गया, परन्तु जब लोगों व व्यापारियों ने अतिक्रमण नहीं हटाया तो निगम को अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही शुरू करनी पड़ी। नगर आयुक्त ने बताया कि लालबत्ती चौराहे से लेकर गिवई स्रोत के बीच चिन्हित सभी अतिक्रमण को हटाया जाएगा।

15 दिन तक चलेगा लगातार अभियान
कोटद्वार। उपजिलाधिकारी कोटद्वार योगेश मेहरा ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही बुधवार से शुरू की गई है। यह अभियान 15 दिन तक लगातार चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कुछ व्यापारियों और लोग ने अतिक्रमण हटाने के लिए समय मांगा है, उनके साथ वार्ता की गई है। उन्हें बताया गया है कि चिन्हित अतिक्रमण को हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया चुका है, यदि उनके द्वारा अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा है तो विधि पूर्वक अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। उन्होंने बताया कि बरामदे और नजूल भूमि पर अतिक्रमण हटाने के होईकोई के आदेश है, अतिक्रमण को तब तक हटाया जाएगा जब तक उसमें समरूपता नहीं आयेगी। उपजिलाधिकारी ने बताया कि अतिक्रमण को हटाने के लिए सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों को साथ लेकर कार्यवाही की जा रही है। पर्याप्त पुलिस बल की मांग की गई थी, बुधवार को अभियान के दौरान पर्याप्त पुलिस बल मौजूद रहा। उन्होंने बताया कि विरोध को देखते हुए आने वाले दिनों में अतिरिक्त पुलिस बल की आवश्यकता पड़ सकती है, इसलिए पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया जा चुका है। एसडीएम ने बताया कि अतिक्रमण हटाने का माननीय उच्च न्यायालय का आदेश है उसका शतप्रतिश अनुपालन किया जाना अनिवार्य है। बुधवार को अभियान के दौरान देखा गया कि लोग अब स्वयं ही अतिक्रमण हटा रहे थे। लोगों को कहा गया कि वह स्वयं ही अतिक्रमण हटा लें, अन्यथा प्रशासन अतिक्रमण को हटायेगा।

व्यापारियों की अधिकारियों के साथ हुई नोकझोंक


कोटद्वार। हाईकोर्ट के आदेश पर स्थानीय प्रशासन द्वारा बुधवार सुबह दल-बल के साथ सरकारी भूमि पर हुए अवैध कब्जे पर हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही व्यापारियों में हडकंप मच गया। इस दौरान कई स्थानों पर व्यापारियों की अधिकारियों के साथ नोंकझोंक भी हुई, लेकिन प्रशासन ने हाईकोर्ट की दुहाई देते हुए व्यापारियों की एक नहीं सुनी और अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही जारी रखी। कुछ लोगों ने अतिक्रमण हटवा रही टीम से पहले कोतवाली कोटद्वार, नगर निगम का भवन व तहसील परिसर की दीवार को हटाने की भी मांग की। एसडीएम ने बताया कि निगम द्वारा चिन्हित सभी अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई जारी रहेगी। अतिक्रमणकारियों को निर्णय की जानकारी देते के लिए पिछले दिनों निगम प्रशासन ने जगह-जगह नोटिस चस्पा कर तीन दिन के भीतर चिह्नित अतिक्रमण को हटाने के निर्देश जारी कर दिए थे। लेकिन उसके बावजूद भी अतिक्रमणकारियों द्वारा अतिक्रमण नहीं हटाया गया। जिसके बाद बुधवार से नगर निगम द्वारा उसको हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

यातायात व्यवस्था में किया बदलाव
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई के दौरान बुधवार को शहर की यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया। सुबह 11 बजे के बाद यातायात व्यवस्था सामान्य हुई। बुधवार सुबह करीब आठ बजे अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम की जेसीबी चलनी शुरू हो गई। ऐसे में यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया। उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद से आने वाली बसों को लालबत्ती चौक पर ही रोका गया, जबकि अन्य वाहनों को पटेल मार्ग से होते हुए तहसील तिराहे से पहाड़ के लिए संचालित किया गया। वहीं, पहाड़ से आने वाले वाहनों को भी परिवर्तित मार्ग से संचालित किया गया। यातायात व्यवस्था बनाने के लिए जगह-जगह पर पुलिसकर्मी तैनात रहे। कार्रवाई के दौरान झंडाचौक पर दुपहिया वाहनों का प्रवेश भी रोक दिया गया था। हालांकि कार्रवाई थमने के बाद सुबह करीब 11 बजे पुरानी यातायात व्यवस्था बहाल हो गई। ऐसी स्थिति में वाहन चालकों ने राहत की सांस ली।

कांग्रेस ने सरकार की कमजोर पैरवी व विधायक की उदासीनता को ठहराया जिम्मेदार
कोटद्वार। जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं ने कोरोना संक्रमण काल में व्यापारियो की दुकानों को तोड़े जाने को प्रदेश सरकार की नैनीताल हाईकोर्ट में कमजोर पैरवी एवं क्षेत्रीय विधायक के उदासीन रवैये को जिम्मेदार ठहराया है। वक्ताओं ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन काबीना मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी के अथक प्रयास से बाई पास मोटर मार्ग को स्वीकृत किया गया था, उक्त मोटर मार्ग के बनने से व्यापारियों के प्रतिष्ठानो को उजड़ने से बचाया जा सकता था, लेकिन प्रदेश में सत्तासीन भाजपा सरकार ने उक्त योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
गढ़वाल टाकीज स्थित कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि प्रदेश सरकार के द्वारा कोटद्वार के व्यापारियों के मामले को लेकर नैनीताल उच्च न्यायालय में सही ढंग से पैरवी करते हुए व्यापारियों की समस्याओ को रखा जाता तो न्यायालय के द्वारा जरूर संज्ञान लिया जाता, लेकिन प्रदेश सरकार ने जानबूझकर कोटद्वार के व्यापारियों की ठीक ढंग से पैरवी नहीं की है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों के हितों की बात करने वाले क्षेत्रीय विधायक का भी उदासीन रवैया रहा है। स्थानीय प्रशासन ने नैनीताल उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए अतिक्रमण हटाया है। इस मौके पर जिलाध्यक्ष डा़ चन्द्रमोहन खर्कवाल, महानगर अध्यक्ष संजय मित्तल, जितेन्द्र भाटिया, बलवीर सिंह रावत, राजेन्द्र गुंसाई, बृजपाल सिंह, गोपाल सिंह, महावीर सिंह रावत, धीरेन्द्र सिंह बिष्ट, यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष अमित राज सिंह, हरेन्द्र पुंडीर, हेमचंद्र पंवार, सुदर्शन सिंह रावत, शंकेश्वर प्रसाद सेमवाल, साबर सिंह नेगी, विनोद नेगी, विजय नारायण सिंह मौजूद थे।

प्रशासन पर लगाया भेदभाव का आरोप
कोटद्वार। नगर निगम के पार्षद सूरज प्रसाद कांति ने प्रशासन पर भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अतिक्रमण को हटाने में सरकरी संस्थाओं एवं व्यापारियों में भेदभाव किया गया है। वर्तमान में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में कोटद्वार में बदरीनाथ मार्ग से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही प्रशासन द्वारा की जा रही है। जिसमें सबसे अधिक व्यापारिक प्रतिष्ठानों को नुकसान हो रहा है। अतिक्रमण हटाने में जेसीबी मशीन का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि व्यापारी वर्ग की कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है। जबकि नेशनल हाईवे में सरकारी संस्थाओं द्वारा भी अवैध अतिक्रमण किया गया है। राजकीय बेस अस्पताल, जीआईसी, कोतवाली, नगर निगम कोटद्वार आदि सरकारी संस्थानों द्वारा किये गये अवैध अतिक्रमण को प्रशासन द्वारा चिन्हित नहीं किया गया है और ना ही उक्त संस्थाओं को नोटिस जारी किये गये है। उन्होंने कहा कि प्रशासन अतिक्रमण के नाम पर व्यापारिक प्रतिष्ठानों एवं व्यापारियों को परेशान कर रहा है। पार्षद ने उपजिलाधिकारी कोटद्वार योगेश मेहरा के माध्यम से जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर बदरीनाथ मार्ग स्थित सरकारी संस्थाओं के कार्यालयों को भी चिन्हित कर अवैध अतिक्रमण ध्वस्त करने के लिए स्थानीय प्रशासन को निर्देशित करने की मांग की है।

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