ऋषिकेश। उत्तराखंड शासन का एक आदेश इन दिनों शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। थलीसैंण के खंड शिक्षा अधिकारी को 217 किलोमीटर दूर डोईवाला का अतिरिक्त प्रभार सौंपते हुए सप्ताह में तीन-तीन दिन दोनों कार्यालयों में बैठने के निर्देश दिए गए हैं। कागजों पर संतुलित दिखने वाला यह आदेश जमीनी हकीकत में ऐसा नजर आता है जिसमें अधिकारी का समय कार्यालय से ज्यादा सड़कों पर बीतेगा। इससे स्पष्ट होता है कि शासन में बैठे अधिकारियों को राज्य की भौगोलिक स्थितियों का कितना ज्ञान है। आदेश के अनुसार खंड शिक्षाधिकारी विवेक पंवार को सोमवार, मंगलवार और बुधवार को पौड़ी जनपद के थलीसैंण और बृहस्पतिवार, शुक्रवार और शनिवार को देहरादून जनपद के डोईवाला कार्यालय में बैठना होगा। जबकि दोनों कार्यालयों के बीच करीब 217 किलोमीटर की दूरी है और एक तरफ का सफर भी करीब छह घंटे से अधिक का है। ऐसे में बृहस्पतिवार को डोईवाला पहुंचने के लिए उन्हें बुधवार को ही रवाना होना पड़ेगा और शनिवार को लौटना होगा या फिर रविवार की छुट्टी यात्रा में बितानी पड़ेगी। यानी सप्ताह में वह प्रभावी रूप से सिर्फ दो दिन थलीसैंण और दो दिन डोईवाला में ही सेवाएं दे पाएंगे जबकि दो दिन लंबी यात्रा में गुजरेंगे। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब अधिकारी का अधिक समय कार्यालय के बजाय सड़क पर बीतेगा। इतनी लंबी दूरी सप्ताह में दो बार तय करना केवल समय की बरबादी ही नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक थकान का कारण भी बनेगा।
ऐसे में किसी भी अधिकारी से पूरी क्षमता के साथ काम लेने की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता।