0-कांग्रेस अध्यक्ष ने ज्ञानेश कुमार को मोदी सरकार का कठपुतली बताया
नई दिल्ली , कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार के हाथों की कठपुतली बन गए हैं। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में खरगे ने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र की मोदी सरकार ने सुनियोजित तरीके से देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और उनकी नींव को कमजोर किया है।
खरगे ने कहा कि वोटर सूची से नाम हटाने का काम सोची-समझी साजिश के तहत किया जा रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मूल भावना यह है कि प्रत्येक योग्य नागरिक का मतदान का अधिकार सुरक्षित रहे और हर मत की निष्पक्ष तरीके से गणना हो।
कांग्रेस अध्यक्ष ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लोकतंत्र का सबसे बुनियादी आधार है। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र मतदाता को किसी अधिकारी के पूर्वाग्रह या मनमाने फैसले के कारण मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
खरगे ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू और डॉ. अंबेडकर यह समझते थे कि लोकतांत्रिक भागीदारी के बिना गरीबों और वंचित वर्गों की आवाज अनसुनी रह जाएगी। इसी कारण संविधान निर्माताओं ने प्रत्येक वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार देने का समर्थन किया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज इसके विपरीत स्थिति दिखाई दे रही है। खरगे ने कहा कि जिस संस्था को लोगों के मतों का संरक्षक बनाया गया है, उसी पर मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित करने के आरोप लग रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि जिस मुख्य चुनाव आयुक्त पर विपक्षी दल और उनके सहयोगी आयुक्त भी सवाल उठा रहे हैं, उस स्थिति में देश चुनाव आयोग पर कैसे भरोसा करेगा।
खरगे ने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को कमजोर करना नहीं है। पार्टी चाहती है कि चुनाव आयोग इतना मजबूत और विश्वसनीय हो कि सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों उसके फैसलों पर समान रूप से भरोसा कर सकें।
उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि यह फैसला किसने लिया और दो चुनाव आयुक्तों को आंतरिक पोर्टल से क्यों दूर रखा गया। उन्होंने पूछा कि क्या चुनाव आयोग के भीतर कोई ऐसी प्रक्रिया चल रही थी, जिसकी जानकारी सभी संबंधित सदस्यों को नहीं थी।
एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों ने हाल के दिनों में राजनीतिक विवाद को बढ़ाया है। एक रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों द्वारा मतदाता सूची से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताए जाने का दावा किया गया है। चुनाव आयोग ने हालांकि अपनी प्रक्रियाओं को कानून के अनुरूप बताया है।