मेट्रो शहरों को पछाड़कर दून बना देश का नंबर-1 शहर

Spread the love

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून ने देश के बड़े महानगरों को पीछे छोड़ते हुए एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि दर्ज की है। भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, देहरादून देश में गैर-कॉर्पोरेट यानी अनिगमित क्षेत्र के कामगारों को सबसे अधिक औसत वार्षिक वेतन देने वाला शहर बनकर सामने आया है। यहां अनिगमित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की औसत सालाना कमाई 4.60 लाख दर्ज की गई है।
देहरादून का यह आंकड़ा देश के 1.47 लाख के राष्ट्रीय औसत से तीन गुना से भी अधिक है। खास बात यह है कि औसत कमाई के मामले में दून ने आर्थिक राजधानी मुंबई और आईटी हब बेंगलुरु जैसे महानगरों को भी पीछे छोड़ दिया है। इससे देहरादून की बदलती अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसरों की तस्वीर सामने आती है।
मुंबई-बेंगलुरु और दिल्ली भी पीछे
सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक गैर-कॉर्पोरेट क्षेत्र में मुंबई और बेंगलुरु में औसत सालाना कमाई करीब ₹3 लाख रही। वहीं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में यह आंकड़ा करीब 2.50 लाख दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अनिगमित क्षेत्र के कामगारों की औसत सालाना कमाई करीब 1.65 लाख रही।
वहीं पटना और रांची जैसे शहरों में औसत कमाई राष्ट्रीय औसत 1.47 लाख से भी नीचे रही। ऐसे में 4.60 लाख की औसत वार्षिक कमाई के साथ देहरादून का शीर्ष पर पहुंचना राज्य के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक संकेत माना जा रहा है।
74,843 अनिगमित उद्यम,
करीब 1.72 लाख श्रमिक
सर्वेक्षण के अनुसार देहरादून जिले में 74,843 अनिगमित उद्यम सक्रिय हैं, जिनमें करीब 1.72 लाख श्रमिक काम कर रहे हैं। इनमें लगभग 31 प्रतिशत इकाइयां दैनिक मजदूरी वाले कामगारों पर निर्भर हैं।
अनिगमित क्षेत्र में छोटे कारोबार, व्यापारिक प्रतिष्ठान, सेवा क्षेत्र, व्यक्तिगत उद्यम और ऐसे व्यवसाय शामिल होते हैं जो बड़े कॉर्पोरेट ढांचे के बाहर संचालित होते हैं। इस क्षेत्र का विस्तार स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने के साथ-साथ शहर की अर्थव्यवस्था को भी गति देता है।
शिक्षा और आईटी से बदली दून की अर्थव्यवस्था
देहरादून की आर्थिक तस्वीर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदली है। कभी सरकारी नौकरियों, सैन्य संस्थानों और पेंशनर्स के शहर के रूप में पहचाने जाने वाले दून में अब उच्च शिक्षा, कोचिंग, आईटी, हॉस्पिटैलिटी, लॉजिस्टिक्स, प्रोफेशनल सर्विसेज और निजी क्षेत्र का तेजी से विस्तार हुआ है।
देश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थी उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए देहरादून पहुंचते हैं। इसके चलते कोचिंग संस्थानों, हॉस्टल, पीजी, रेस्टोरेंट, परिवहन, किराये के आवास और अन्य सेवा क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
आईटी और डिजिटल सेवाओं से जुड़े छोटे एवं मध्यम स्तर के उद्यमों के बढ़ने से कुशल युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए विकल्प तैयार हुए हैं। हॉस्पिटैलिटी और पर्यटन क्षेत्र ने भी इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उत्तराखंड में मैदानी जिले आगे
राज्य के भीतर अनिगमित क्षेत्र में कामगारों की औसत कमाई में भी स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों वाले मैदानी जिलों में कमाई अपेक्षाकृत अधिक है।
हरिद्वार में सिडकुल, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के चलते अनिगमित क्षेत्र के कामगारों की औसत सालाना कमाई करीब 2.40 लाख रही।
उधमसिंह नगर में ऑटोमोबाइल, पैकेजिंग और फार्मास्युटिकल उद्योगों की मौजूदगी के कारण यह आंकड़ा करीब 2.25 लाख दर्ज किया गया।
वहीं हल्द्वानी कुमाऊं के प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में करीब 2.10 लाख की औसत वार्षिक कमाई के साथ आगे रहा।
पहाड़ों में कमाई का आंकड़ा अब भी कम
पर्वतीय जिलों में रोजगार के सीमित अवसर और औद्योगिक गतिविधियों की कमी का असर औसत कमाई पर भी दिखाई देता है। टिहरी में औसत वार्षिक कमाई करीब 1.60 लाख रही, जबकि उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जैसे अधिकांश पर्वतीय जिलों में यह आंकड़ा लगभग ₹1.15 लाख से ₹1.40 लाख के बीच रहा।
यह अंतर बताता है कि राज्य में आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसर अभी भी मुख्य रूप से मैदानी और बड़े शहरी केंद्रों में केंद्रित हैं। पर्वतीय जिलों में स्थानीय रोजगार बढ़ाने के लिए पर्यटन, कृषि-आधारित उद्योग, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और छोटे उद्यमों को बढ़ावा देने की जरूरत बनी हुई है।

सरकारी नौकरी वाले शहर से आधुनिक सेवा अर्थव्यवस्था तक
देहरादून की इस उपलब्धि को शहर की बदलती आर्थिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है। दून की पहचान लंबे समय तक सरकारी संस्थानों, रक्षा प्रतिष्ठानों, शिक्षा और पेंशनर्स के शहर के रूप में रही है। लेकिन अब निजी क्षेत्र, शिक्षा, तकनीक, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी और अन्य सेवा क्षेत्रों का बढ़ता प्रभाव शहर की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है।

₹4.60 लाख की औसत वार्षिक कमाई का आंकड़ा इस बदलाव का महत्वपूर्ण संकेत है। हालांकि औसत वेतन का आंकड़ा अलग-अलग व्यवसायों और कामगारों की वास्तविक आय में मौजूद अंतर को पूरी तरह नहीं दर्शाता, फिर भी यह दून में उच्च-मूल्य वाली सेवाओं और कुशल मानव संसाधन की बढ़ती मांग को रेखांकित करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *