नईदिल्ली, मानसून के अटकने से देशभर के लोगों खासतौर पर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। हालांकि, अब मानसून के आगे बढ़ने की अनुकूल परिस्थितियां बनने लगी हैं। मौसम पूर्वानुमानों से संकेत मिल रहा है कि मध्य भारत में बारिश लाने वाले बादल धीरे-धीरे फिर से मजबूत हो रहे हैं। मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, 23 जून तक मानसून के तेलंगाना से आगे बढ़कर छत्तीसगढ़ पहुंचने की संभावना है।
आईएमडी के मुताबिक, महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मानसून के लिए जरूरी सिस्टम सक्रिय हो गया है। 19 जून से 25 जून के बीच छत्तीसगढ़, पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश और विदर्भ में छिटपुट से लेकर तेज बारिश होने की संभावना है। बता दें कि मानसून केरलम पहुंचने के बाद 19 राज्यों तक पहुंच चुका है, लेकिन 8 जून से तेलंगाना में अटका हुआ है।
आईएमडी के मुताबिक, पश्चिमी मध्य प्रदेश में 21 से 23 जून के बीच बिजली गिरने और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 20 से 23 जून और विदर्भ में 19 से 23 जून तक ऐसी ही स्थिति रहने का अनुमान है। छत्तीसगढ़ में 19 से 23 जून के बीच गरज और बिजली गिरने की आशंका है, जिसमें 22 और 23 जून को अधिक तीव्रता की संभावना है।
21 जून को बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बारिश की संभावना। बिहार में कुछ जगहों पर तेज हवाएं चल सकती हैं। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। 22 जून को झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है।
मानसून आने में देरी होने के पीछ अल-नीनो समेत कई कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। अल-नीनो प्रशांत महासागर में पानी के गर्म होने की मौसमी घटना है, जिससे मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं। इसके अलावा मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन का कमजोर होना भी वजह है, जो बादलों को दक्षिण भारत से उत्तर भारत की ओर लाने में अहम भूमिका निभाता है। इसके चलते 1-18 जून के बीच देश में सामान्य से 38 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।