नवजात बच्ची की मौत से फैली सनसनी

ऊधम सिंह नगर।उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में नवजात बच्ची को चर्च के पास असुरक्षित हालत में छोड़ने और बाद में उसकी मौत होने के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में बच्ची की 23 वर्षीय मां शीतल, 45 वर्षीय नानी लीलावती और 30 वर्षीय मुनीश पाल शामिल हैं। गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाई गई बच्ची ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और नवजात की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
चर्च के पास कार के नीचे मिली थी बच्ची
पुलिस के अनुसार, 17 अक्टूबर को डायल 112 के माध्यम से सूचना मिली कि रुद्रपुर की सिंह कॉलोनी स्थित सेंट जॉन चर्च के पास खड़ी एक कार के नीचे कपड़े में लिपटी नवजात बच्ची पड़ी हुई है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। उसकी हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने उसे बेहतर उपचार के लिए हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर कर दिया।
अस्पताल में चिकित्सकों ने बच्ची को बचाने का प्रयास किया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। पुलिस क्षेत्राधिकारी विभव सैनी के अनुसार, उपचार के दौरान देर रात बच्ची की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। बच्ची को वहां छोड़ने वालों की पहचान करने के लिए घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। जांच के दौरान सामने आई फुटेज में एक मोटरसाइकिल पर दो महिलाएं और एक पुरुष दिखाई दिए। पुलिस ने फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान की। इसके बाद सोमवार को ट्रांजिट कैंप क्षेत्र के आजादनगर से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
निजी अस्पताल में हुआ था जन्म
पुलिस की जांच में सामने आया कि शीतल ने 16 अक्टूबर की रात उत्तर प्रदेश के बिलासपुर स्थित एक निजी अस्पताल में बच्ची को जन्म दिया था। 17 अक्टूबर को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद नवजात को घर ले जाने के बजाय चर्च के पास छोड़ दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, बच्ची की मां और नानी मुनीश पाल की मोटरसाइकिल से वहां पहुंची थीं। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने तीनों की भूमिका और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की।
पूछताछ में आर्थिक परेशानी का दावा
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नवजात की तबीयत खराब थी और उसके इलाज पर अधिक खर्च आने की आशंका थी। परिजनों ने आर्थिक परेशानी तथा उपचार का खर्च उठाने में असमर्थता का हवाला दिया।
हालांकि, यह आरोपियों की ओर से बताई गई वजह है। मामले से जुड़े सभी तथ्यों, परिस्थितियों और आरोपियों की भूमिका की जांच पुलिस कर रही है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।
नवजात की मौत ने खड़े किए गंभीर सवाल
यह घटना केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि नवजात बच्चों की सुरक्षा और संकट की स्थिति में उपलब्ध सहायता व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े करती है। बच्ची को समय पर सुरक्षित वातावरण और आवश्यक चिकित्सा सहायता मिलना बेहद जरूरी था। उसे सार्वजनिक स्थान पर असुरक्षित हालत में छोड़ने के कारण उसकी जान नहीं बच सकी।

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