नई पेंशन योजना से कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित नहीं

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7 जून को रात 9 बजे अधिकारी/कर्मचारी जलायेगें दीपक
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा उत्तराखण्ड गढ़वाल मण्डल के पदाधिकारियों ने कहा कि राज्य के सभी राजकीय विभागो में 1 अक्टूबर 2005 के पश्चात नियुक्त सभी राजकीय कार्मिकों के लिए पुरानी पेंशन एवं जीपीएफ व्यवस्था केन्द्र/राज्य सरकार द्वारा बंद कर दी गयी है। वर्तमान में केन्द्र/राज्य सरकार द्वारा संचालित की गयी नवीन पेंशन योजना से कर्मचारियों का भविष्य उस प्रकार से सुरक्षित नहीं है जैसा कि पुरानी जीपीएफ पेंशन योजना से था। 01 अक्टूबर 2005 से पूर्व कार्यरत सभी राजकीय अधिकारी/शिक्षक/कार्मिक अपने वेतन का एक अंश स्वयं जीपीएफ के तहत कटवाते हैं उस पर एक निर्धारित ब्याज प्रक्रिया भी है। अपने सेवाकाल के समय अपनी आवश्यकतानुसार अपने जीपीएफ से अपना पैसा निकाला जाता था।
मोर्चा के मंडलीय अध्यक्ष जयदीप रावत, मंडलीय सचिव सीताराम पोखरियाल ने कहा कि 7 जून को रात 9 बजे सभी अधिकारी/शिक्षक/कर्मचारी जो पुरानी पेंशन व्यवस्था से विहीन एवं एनपीएस से आच्छादित है वह अपने-अपने घरों में दीपक जलाकर कोरोना महामारी के संक्रमण काल में देशहित, देश के प्रत्येक सामाजिक संस्थान एवं राजकीय सेवाओं में कार्यरत समस्त प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कोरोना योद्धाओं की सकुशलता एवं राजकीय अधिकारी/शिक्षक/कार्मिकों के लिए पुरानी पेंशन एवं जीपीएफ व्यवस्था पुन: लागू कराने हेतु केन्द्र/राज्य सरकार से अपील करेगें। ताकि एनपीएस जैसा अंधेरा प्रत्येक राजकीय कार्मिक के जीवन से हमेशा के लिए समाप्त हो जाये और पुरानी जीपीएफ पेंशन व्यवस्था एक रोशनी एवं जीवन की भांति सभी के भविष्य को सुरक्षित एवं सुनहरा कर पायें। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वर्ष 2005 के पश्चात शासकीय सेवाओं से सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी/शिक्षक/कर्मचारियों को एनपीएस के तहत मात्र 1300 से 1500 रूपये मासिक पेंशन सरकार द्वारा दी जा रही है। जिसमें किसी भी प्रकार का डीए कभी नहीं जोड़ा जायेगा। इस प्रकार एनपीएस द्वारा हम सभी के वर्तमान एवं भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है जो कि कार्मिक हित में किसी भी प्रकार से उपयोगी नहीं है।

प्राइवेट कम्पनियों को बनाया जा रहा धनी
मोर्चा के मंडलीय अध्यक्ष जयदीप रावत, मंडलीय सचिव सीताराम पोखरियाल ने कहा कि प्रत्येक सरकारी कार्मिक का पैसा जो प्राइवेट कम्पनियों को अधिक से अधिक धनी बनाने हेतु उनके शेयर बाजार पर लगाया गया है जो शायद ही किसी भी कार्मिक को उसकी जरूरत के वक्त मिल पाये। यही धनराशि वर्तमान में अगर केन्द्र सरकार किसी राजकीय संंस्था में लगाती तो यह पैसा निश्चित रूप से आज देशहित में (कोविड-19) के संक्रमण को रोकने हेतु उपयोगी सिद्घ होता। हम सभी का दुर्भाग्य है कि देश का अपना पैसा आज प्राइवेट कम्पनियों के खातो में जमा है जिसे सरकार छू तक नही सकती।

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