नईदिल्ली,। केंद्र सरकार ने कहा है कि वह पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करने जा रही है। सरकार ने ये बात सुप्रीम कोर्ट को बताई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर के साथ क्या किया जाए, इस पर कुछ गलतफहमी थी। मुझे यह कहने के निर्देश हैं कि सरकार छात्रों पर अपने वादे को लेकर गंभीर है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील वृंदा ग्रोवर ने जानना चाहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर क्या वापस ली जाएंगी या रद्द की जाएंगी।
उन्होंने कहा, ये युवा लोग हैं जिनका पूरा जीवन उनके सामने है। यहां तक कि मुकदमे को रद्द करने के लिए भी हमारे पास बिहार, बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में एफआईआर दर्ज हैं। राज्यों के साथ इस मामले को सुलझाने के बाद हम इस कोर्ट में वापस आएंगे।
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा, हमने उन पुलिसकर्मियों की पहचान कर ली है, जिन्होंने कार्रवाई की थी। हलफनामे में बताया जाना चाहिए कि आरएएफ को निर्देश देने के लिए कौन जिम्मेदार था। पुलिस कमिश्नर और आरएएफ निदेशक को निर्देश दिए जाए कि वे बताएं कि उन्होंने पैलेट गन और लाठीचार्ज की अनुमति कैसे दी। पुलिस को इस तरह से काम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। हलफनामे में इन सवालों के जवाब दिए जाने चाहिए।