उधमसिंहनगर। रसायनों के खतरनाक मिश्रण से अवैध प्रयोगशालाओं में तैयार हो रही डिजाइनर ड्रग्स भी तराई क्षेत्र के जरिए कुमाऊं में पहुंच रही है। पंजाब, महाराष्ट्र और दिल्ली के बाद अब तस्करों ने तराई को नशे की सप्लाई का नया कॉरिडोर बना लिया है। बीते दो वर्षों में जिले में करीब 15 करोड़ रुपये की डिजाइनर ड्रग्स पकड़ी जा चुकी है जबकि एनडीपीएस एक्ट के तहत 500 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं।डिजाइनर ड्रग्स सामान्य नशीले पदार्थों से अलग होती है। इन्हें रसायनों और प्रतिबंधित दवाओं के मिश्रण से अवैध लैबों में तैयार किया जाता है। एमडीएमए (मैथिलिन डाईऑक्सी मेथमफेटामाइन), मेफेड्रोन, ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी दवाओं व रसायनों के मिश्रण से तैयार यह नशा युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है।
-दिसंबर 2025 में काशीपुर पुलिस ने 1.32 करोड़ रुपये मूल्य के 43,950 नशीले इंजेक्शन बरामद किए थे। जांच में सामने आया था कि इंजेक्शन जालंधर से एक मेडिकल स्टोर के नाम पर बुक कराकर भेजे गए थे। इस मामले का मुख्य आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है।
-जून 2025 में एसटीएफ ने नानकमत्ता से टनकपुर निवासी कुनाल राम कोहली को गिरफ्तार किया था। उसके पास से 126 लीटर प्रतिबंधित केमिकल और 28 किलो पाउडर बरामद हुआ था। जांच में पता चला कि बरामद कच्चे माल से करीब 12 किलो एमडीएमए तैयार की जा सकती थी, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये बताई गई।
-गदरपुर में एसटीएफ ने हिस्ट्रीशीटर शाकिर अली उर्फ नकटा और उसकी पत्नी शाईन को भी गिरफ्तार किया था। आरोप है कि दोनों अपने नाबालिग बेटे के जरिए ड्रग्स की तस्करी करा रहे थे। पुलिस ने बेटे के पास से 33 लाख रुपये की हेरोइन बरामद की थी। शाकिर के खिलाफ नौ और शाईन के खिलाफ छह आपराधिक मामले दर्ज हैं।
डिजाइनर ड्रग्स शरीर के लिए खतरनाक
काशीपुर के चिकित्सक डॉ. अरविंद शर्मा ने बताया कि डिजाइनर ड्रग्स का सेवन शरीर के तापमान को असामान्य रूप से बढ़ा सकता है। इसके बाद लगातार पानी पीने से शरीर में सोडियम की मात्रा कम हो सकती है, जिससे डिहाइड्रेशन और हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक सेवन से सेरोटोनिन सिस्टम प्रभावित हो सकता है, जिससे मस्तिष्क पर गंभीर असर पड़ सकता है। कई डिजाइनर ड्रग्स में मेथ, केटामिन और फेंटानिल जैसे खतरनाक पदार्थों की मिलावट पाई जाती है। फेंटानिल की बहुत कम मात्रा भी जानलेवा साबित हो सकती है।