सार्वजनिक शौचालय व्यवस्था को लेकर उठे सवाल, पार्षद ने सुधार की मांग उठाई

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अल्मोड़ा। नगर क्षेत्र में एक विदेशी महिला को टॉयलेट सुविधा न मिलने से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद सार्वजनिक सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस मामले को शहर की छवि से जोड़ने के बजाय मूलभूत सुविधाओं की कमी के रूप में देखने की बात कही जा रही है। पार्षद वैभव पांडे ने जारी बयान में कहा कि वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने मौके पर महिला की मदद की, जो एक मानवीय पहल थी और इसे राजनीति से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि होटल या रेस्टोरेंट में टॉयलेट उपलब्ध होने की बात व्यवहारिक नहीं है, क्योंकि गांवों से आने वाले लोग, महिलाएं और बुजुर्ग संकोच के कारण ऐसी जगहों का उपयोग करने से हिचकते हैं। उन्होंने डायबिटीज समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके लिए सार्वजनिक शौचालय की उपलब्धता अनिवार्य है। बार-बार टॉयलेट की आवश्यकता होने पर सुविधा का अभाव गंभीर परेशानी पैदा करता है। पार्षद ने कहा कि यदि कोई नागरिक व्यवस्था की कमियों को सामने लाता है, तो उसे राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। समस्याएं उठाना जनमानस का अधिकार है और हर मुद्दे को राजनीति से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व की स्थितियों का हवाला देना समाधान नहीं है, बल्कि वर्तमान में जिम्मेदारी संभाल रहे प्रतिनिधियों को समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने नगर में सार्वजनिक शौचालयों के लिए स्पष्ट दिशा सूचक बोर्ड लगाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे बाहरी लोगों और पर्यटकों को सुविधा मिलेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि अब आरोप-प्रत्यारोप के बजाय ठोस कदम उठाने की जरूरत है और नगर में पर्याप्त, स्वच्छ एवं सुलभ सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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