राखी की बिक्री से महिला समूहों को मिला रोजगार

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चम्पावत। राखी की बिक्री से महिला समूहों को रोजगार मिल रहा है। लोग समूह की बनाई राखियों को हाथों हाथ ले रहे हैं। कई स्वयं सहायता समूह अब तक पांच-पांच हजार रुपये मूल्य की राखियों की बिक्री कर चुके हैं। इससे महिलाओं की आर्थिकी में सुधार हो रहा है। इस बार चीन निर्मित राखियां बाजार से नदारद हैं। यही वजह है कि चम्पावत का बाजार स्थानीय स्तर पर बनाई गई राखियों से पटा हुआ है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं ने समूह बनाए हैं। समूह में शामिल महिलाएं स्थानीय स्तर पर राखियां तैयार कर रही हैं। ज्योति सहायता समूह, मां पूर्णागिरि समूह, अन्नपूर्णा समूह, ओम बाला जी शारदा और जय ईष्ट देव स्वयं सहायता समूह से दस-दस महिलाएं जुड़ी हुई हैं। एपीडी विम्मी जोशी ने बताया कि समूहों को एनआरएलएम से दस-दस हजार रुपये की मदद दी गई थी। बताया कि हर समूह ने अब तक पांच-पांच हजार रुपये मूल्य की राखियों की बिक्री की है।

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