उत्तराखंड

बिना एनओसी के डम्पिंग जोन बनाने से ग्रामीणों में आक्रोश

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रुद्रप्रयाग। रेलवे परियोजना द्वारा जवाड़ी में ग्राम पंचायत की एनओसी के बिना डंपिंग जोन बनाए जाने को लेकर ग्रामीणों ने कड़ी नाराजगी जताई है। साथ ही परियोजना पर ग्राम पंचायत के जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण, गौचर भूमि और पारस्थितिकी तंत्र को बर्बाद करने का आरोप लगाया है। कहा कि यदि ग्रामीणों की मांगों पर परियोजना द्वारा कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि रेलवे परियोजना हम सब लोगों के लिए महत्वाकाक्षी परियोजना है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायत जवाड़ी के लोगों ने परियोजना के कार्य शुरू होने के समय बड़ी ब्लास्टिंग से घरों में आने वाली दरार का भी विरोध नहीं किया। निर्माणदायी संस्था ने ग्राम पंचायत से बिना एनओसी के बाद भी गांव के नीचे डम्पिंग जोन बना दिया। इसका अर्थ यह नहीं कि ग्रामीण विरोध नहीं कर सकते हैं। परियोजना द्वारा डम्पिंग जोन बनाने से गांव की महिलाओं का जंगल से चारा पत्ती लाने का रास्ता बंद हो गया और ग्रामीणों को अनेक मौको पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गांव की जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण और गौचर एवं चरागाह नष्ट हो गए हैं। हजारों वर्ष पुराने गदेरे का भविष्य खत्म कर दिया गया है। महाविद्यालय भवन भी खतरे की जद में आ गया है। कहा कि ग्रामीण अब परियोजना के मनमाने कार्य से परेशान है और 7 जुलाई से संस्था के किसी भी वाहन को बाईपास पुल से आगे नहीं जाने देगी। गांव के रास्ते मलबे और कीचड़ में तब्दील हो गए हैं। यह क्षेत्र डूब क्षेत्र बन गया है। महिलाओं की शिकायत के बाद ग्रामीणों ने बैठक कर कम्पनी के इस तरह की निरंकुशता को रोकने का फैसला लिया है। पूर्व में 28 मार्च को जिलाधिकारी को भी क्षति पूर्ति के लिए पत्र दिया गया है जिसमें मेघा कम्पनी के प्रबंधक से 18 अप्रैल को वार्ता की गई। किंतु इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। कहा कि ग्राम विकास समिति उत्यासू जवाड़ी की मांग है कि चोपड़ा गदेरे को एक समतल मैदान बनाया जाए जिससे खेल मैदान विकसित हो सके और इस क्षेत्र में वृक्षारोपण किया जाए। गांव का एक क्षेत्र सड़क से वंचित है। करीब दो किमी सड़क बनाकर ग्रामीणों को मुख्यालय आने के लिए यातायात की सुविधा दी जाए। कहा कि यदि रेवले परियोजना द्वारा ग्रामीणों की मांगों पर कार्रवाई नही की गई तो आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।

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